पीजीआई के अयोग्य अधिकारियों को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट के फैसले को रिव्यू करने के लिए अधिकारियों की ओर से डाली गई याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने सितंबर 2013 को हाईकोर्ट के फैसले को रिव्यू करने की मांग की थी। इस फैसले के आधार पर पीजीआई ने एक जांच कमेटी गठित की थी।
कमेटी ने अपनी जांच में दो अधिकारी और एक कर्मचारी की नियुक्ति पर सवाल उठाया था। सवालों के घेरे में आए असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर दिनेश कुमार और असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर सुरेंद्र कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने सितंबर में दिए फैसले को रिव्यू करने की मांग की।
उनके मुताबिक 12 सितंबर को हाईकोर्ट ने जिस याचिका के आधार पर फैसला दिया था, उसमें कई तथ्य छिपाए गए थे। उनका कहना था कि इसी साल 8 मार्च को पीजीआई के रिटायर्ड कर्मचारी सुभाष चंद्र ने उनकी नियुक्तियों को चैलेंज किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उस अर्जी को खारिज कर दिया था।
इसी फैसले को आधार मानकर याचिकाकर्ताओं ने फैसले को रिव्यू करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों की याचिका को खारिज कर दिया।
यह था मामला
कुछ अधिकारियों की नियुक्ति पर सवाल खड़े होने पर हाईकोर्ट ने पीजीआई को एक जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच करने के आदेश दिए थे। कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि वर्ष 2009 असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर और असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर और 1998 में एलडीसी के रूप में जिन्हें नियुक्त किया गया, उनके पास नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता के अनुरूप अनुभव नहीं था।
साथ ही कई अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा नहीं करते थे। इंटरव्यू के दौरान इन्हें कई सर्टिफिकेट जमा कराने को कहा गया था, जो अब तक नहीं जमा कराए गए। साथ ही टेक्निकल टेस्ट भी नहीं दिया।
इसके बावजूद उनकी नियुक्तियां कर दी गई। फिलहाल कमेटी की ओर से तीनों को शो-काज नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। सूत्रों ने बताया कि एक दो की ओर से जवाब दिया जा चुका है। यह मामला पीजीआई के एडहॉक फ्रंट इंपलायज यूनियन की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद सामने आया है।