मुख्यमंत्री व सरकार के मंत्रियों, अफसरों ने केंद्र सरकार से बात कर सात अप्रैल तक जवाब देने की बात कही थी। लेकिन तय समय सीमा में सरकार ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है। इसलिए पांच अप्रैल को करनाल में राज्य कार्यकारिणी में लिए गए निर्णय के अनुसार ही आठ अप्रैल से प्रदेशभर के सभी आढ़ती गेहूं खरीद में सहयोग नहीं करेंगे।
तौल व लदान सरकार चाहे तो अपने संसाधनों से करा सकती है लेकिन सरकार जब भी आढ़तियों की मांगों को पूरा करते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी तो आढ़ती एसोसिएशन गेहूं खरीद के बहिष्कार पर पुनर्विचार कर सकती है। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मवीर मलिक, शिव कुमार, बनारसी दास, विकास लाडवा, रजनीश चौधरी, बिट्टू कालड़ा, मनोज रिंकू, राकेश खोकर, मग्गा सिंह, जितेंद्र कुमार, राजेश अरोड़ा आदि शामिल रहे।
10 अप्र्रैल से मजदूरों ने भी किया हड़ताल का एलान
अनाज मंडियों में गेहूं खरीद का कार्य कर रहे श्रमिकों के संगठन भारतीय मजदूर संघ के प्रधान राम कुमार महतो ने बताया कि सरकार ने मंडियों में काम कर रहे मजदूरों की मजदूरी को पिछले साल से भी कम कर दिया है। पिछले साल 15.75 प्रति बैग मिलता था, इस साल 12.85 रुपये कर दिया है। जबकि इस साल मजदूरी बढ़नी चाहिए थी। मजदूरी नहीं बढ़ाई जाती है तो 10 अप्रैल से हड़ताल पर जाएंगे। आढ़तियों के सहयोग में तौलाई व लदान का कार्य नहीं करेंगे।