राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना के पानी के मुक्त प्रवाह को सरकार सुनिश्चित कर रही है और कोई अवैध बांध या अन्य संरचनाएं आपूर्ति को बाधित नहीं कर रही हैं। यह जानकारी यमुना के जल को लेकर लंबित याचिका में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा दाखिल की गई अर्जी पर जवाब दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार ने दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के इस जवाब पर दिल्ली जल बोर्ड को अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने बताया कि स्वच्छ यमुना जल की निर्बाध आपूर्ति दोनों राज्यों के बीच पानी की गुणवत्ता और इसके वितरण के मुद्दे (अंतरराज्यीय नदी जल विवाद) की प्रकृति के हैं और उच्च न्यायालय द्वारा इसे तय नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा कि प्रवेश बिंदु पर पानी साफ है लेकिन दिल्ली के क्षेत्र में प्रवेश करते ही यह प्रदूषित हो जाता है।
दिल्ली के लिए पर्याप्त पानी की आपूर्ति की मांग करने वाले वकील एसबी त्रिपाठी ने 2013 में जनहित याचिका दाखिल की थी। इसी याचिका में दिल्ली जल बोर्ड ने अर्जी दाखिल करते हुए पानी की आपूर्ति का मुद्दा उठाया है। दिल्ली जल बोर्ड ने कहा कि मई 2019 में हाईकोर्ट ने नदी से अवैध बांधों व अवरोधों को हटाने का निर्देश दिया था, जो दिल्ली में पानी के प्रवाह को अवरुद्ध करते हैं।
प्रतिक्रिया में सरकार ने कहा कि 2019 के आदेश का पालन किया गया है और बिना किसी बाधा के दिल्ली को पानी की आपूर्ति की जा रही है। दिल्ली को सभी स्रोतों से मुनक नहर से 719 क्यूसेक पानी का आवंटन किया गया है, जिसे नहर नेटवर्क के माध्यम से आपूर्ति की जा रही है। हरियाणा के नागरिकों के हिस्से का करीब 321 क्यूसेक पानी दिल्ली को डायवर्ट कर करीब 1,040 क्यूसेक पानी की आपूर्ति हरियाणा कर रहा है।
यहां यह बताया जा सकता है कि हरियाणा ने आज तक 1,040 क्यूसेक की वर्तमान आपूर्ति को कम करने के बारे में कुछ भी नहीं कहा है। केवल इसलिए कि दिल्ली जल बोर्ड के कुछ अधिकारी इन बांधों को देखा है, ये बांध दिल्ली को पानी की आपूर्ति में बाधा नहीं बन रहे। 24 मई, 2019 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय राजधानी में बिना किसी बाधा के पानी की आपूर्ति हो।