इसी बीच आईएएस, आईपीएस की चल-अचल संपति का ब्यौरा तो भारत सरकार की वेबसाइट पर डाल दिया गया, लेकिन राज्य के राजपत्रित अधिकारी संपति का ब्यौरा सार्वजनिक करने का विरोध करने लगे। कपूर ने सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया कि जब देश के सभी आईएएस, आईपीएस, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों की संपति सार्वजनिक हो चुकी है तो राजपत्रित अधिकारियों का विरोध कोई मायने नहीं रखता।
बीते 26 जून को इस केस की सुनवाई के उपरांत आयोग की खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव से इस मुद्दे पर राय मांगी थी। गुरुवार को सुनवाई में शामिल मुख्य सचिव कार्यालय के अधिकारियों ने खंडपीठ को बताया कि मुख्य सचिव ने इस मामले में एसीएस नवराज संधू सहित चार आईएएस अधिकारियों की कमेटी गठित कर रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी ने सभी राजपत्रित अधिकारियों की संपति को सार्वजनिक करने की सहमति प्रकट की है।