पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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मनीषा ने कहा कि उसका मीटर जला हुआ है इसलिए वह रिश्वत नहीं देगी और कर्मियों के खिलाफ सीएम विंडो में शिकायत की गई। शिकायत के बाद बिजली कर्मचारी उसके घर आए और मीटर लगा कर चले गए। कुछ दिनों बाद उसको बिजली निगम का नोटिस मिला जिसमे उस पर बिजली चोरी का आरोप लगाया गया। इसके साथ ही नब्बे हजार रुपये जुर्माना भरने को कहा गया।
नोटिस में कहा गया कि उसके घर 26 जून 2015 को चेकिंग के दौरान उसे बिजली चोरी करते हुए पकड़ा गया जबकि याची ने बताया कि सच्चाई यह है कि 26 जून 2015 को बिजली विभाग के कर्मचारियों ने उसके घर का मीटर बदला था। इसके बाद बिजली का बिल आता रहा और वह बिल का भुगतान भी कर रही थी।
याचिकाकर्ता के वकील प्रवीण रोहिला ने हाईकोर्ट को बताया कि बिजली निगम के नियम के तहत अगर उपभोक्ता का मीटर जलता है ओर वह लगातार बिल पेमेंट करता है तो उसे किसी तरह की कोई पेनाल्टी नहीं लगाई जा सकती।
मनीषा ने एसडीओ राकेश दहिया से मिलकर अपनी शिकायत रखी तभी सुनील अरोड़ा ने एसडीओ को बताया कि यह नोटिस एक्सईएन ने तैयार करवाया था। निगम के खिलाफ सीएम विंडो में शिकायत देने के कारण यह कार्रवाई की गई थी। तभी एसडीओ ने उसके साथ बदतमीजी की और कहा कि वह जुर्माने की राशि तुरंत भर दे वरना अंजाम बुरा होगा।
हाईकोर्ट ने इस पर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि यह क्या हो रहा है। क्या सरकार की आंखें बिल्कुल बंद है। इस पर सरकार ने कहा कि पुलिस एफआईआर की जांच कर रही है। कोर्ट ने निगम के अधिकारियों से पूछा कि कैसे मृतक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब मृतक का नाम बिजली विभाग के रिकॉर्ड में ही स्वर्गीय के नाम से अंकित है तो फिर कैसे उसके नाम एफआईआर हुई। क्या निगम के अधिकारी मानसिक रूप से ठीक नहीं है या उन्हें दूसरों को परेशान करना अच्छा लगता है। हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के एमडी, एक्सईएन, एसडीओ से जवाब तलब कर लिया है साथ ही एफआईआर पर कार्रवाई पर रोक लगा दी है।