हरियाणा के मेवात क्षेत्र में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस ने प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। पांच हजार पुलिसकर्मियों की 102 टीमों ने नूंह के 14 गांवों में 300 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने एसटीएफ के साथ मिलकर 207 साइबर ठगों को पकड़ा और 14 केस दर्ज किए। पकड़े गए साइबर ठगों में 20 से 30 वर्ष की आयु तक के युवक हैं। इनमें 10वीं से लेकर स्नातक तक शिक्षित हैं।
हरियाणा का नूंह बिहार का जामताड़ा बनता जा रहा था। आस-पास के प्रदेशों से पुलिस के पास साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे थे। अधिकतर मामलों में मेवात के 14 गांव के आरोपी इसमें शामिल पाए जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने इसकी जानकारी आला अफसरों को दी। मामाला मुख्यमंत्री तक पहुंचा और कार्रवाई को हरी झंडी मिली।
चार माह पहले पुलिस ने इसे आपरेशन साइबर नाम दिया और तैयारी शुरू कर दी। एक माह पहले पूरे प्रदेश की साइबर टीमों को इसके लिए पांच दिन का विशेष कोर्स करवाया गया। इस दौरान प्रदेश भर की टीमों से साइबर अपराध का डाटा लिया तो नूंह के 14 गांव इस आंकड़े में सामने आए। इसके बाद पुलिस ने करीब 1400 संदिग्ध नंबर चिन्हित किए और उन्हें सर्विलांस पर लिया।
इन नंबरों की मानीटिरिंग हुई तो पाया गया कि यह साइबर ठगी में सक्रिय हैं। मामला नूंह से जुड़ा था सरकार किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहती थी। इसलिए रमजान माह में इस कार्रवाई को टाल दिया गया। वरना पुलिस के पास रमजान से पहले यह जनकारी आ गई थी कि कौन से लोग इस अपराध में संलिप्त हैं। रमजान का महीना समाप्त होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
ऐसे बनी रणनीति
पुलिस ने 14 गांव के लिए 102 रेड टीमों का गठन किया। इनमें वह पुलिसकर्मी शामिल किए गए, जो तेज तर्रार थे। आपरेशन की जानकारी गुप्त रहे यह पुलिस के लिए चुनौती थी, लेकिन कार्रवाई सफल हुई। 102 टीमों ने रात के दो बजे 14 गांव में रेड की और करीब 125 लोगों को उठाया। अभी इस मामले में पूछताछ चल रही है।
अंतरराज्यीय गिरोह का शक
पुलिस को शक है कि यह एक अंतरराज्यीय गिरोह है। जिसमें पढ़े लिखे युवा शामिल हैं। जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है वे सफेदपोश की तरह काम कर रहे थे, क्योंकि अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसलिए इन लोगों ने इस काम को एक व्यवसाय की तरह करना शुरू कर दिया था।
फर्जी आईडी पर चल रहे थे 1400 सिम
नूंह में करीब 1400 सिम फर्जी आईडी पर चल रहे थे। पुलिस को यह जानकारी मिली तो सबसे पहले यह पता किया कि यह सिम कहां से जारी किए गए हैं। फिर यह पता किया गया कि जिनकी आईडी पर यह सिम हैं वह कौन लोग हैं। पता चला कि आईडी भी फर्जी बनाए गए हैं। अब पुलिस यह पता कर रही है कि जिनके नाम पर आईडी बनाए गए हैं वे नाम किस डाटा से अपराधियों के पास आए।
हमने इनके पास से डिजिटल डिवाइस बरामद की हैं। उसके आधार पर जो लीड मिलेगी फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए लंबी प्लानिंग करनी पड़ी तब जाकर इतना बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हुआ। इस कार्रवाई में डीआईजी एसटीएफ और एसपी मेवात ने बड़ी भूमिका निभाई है।
- पीके अग्रवाल, डीजीपी