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Haryana Panchayat Election: सात सांसदों समेत कई विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर, मतदान कम होने के क्या है मायने

Sun, 30 Oct 2022 11:07 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

ग्रामीण क्षेत्र में कम मतदान के कई मायने निकाले जा रहे। राजनीतिक दल इसकी समीक्षा करेंगे। सरपंच के लिए अलग दिन मतदान होना भी इसका कारण माना जा रहा है। अगले चरणों व पंच-सरपंच चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। 
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कैथल में लाइन में लगे लोग। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा में पहले चरण के पंचायती राज चुनाव में दिग्गजों की साख दांव पर हैं। नौ जिलों में हुए जिला परिषद व ब्लॉक समिति के ओवरऑल मतदान के मुकाबले मतदान प्रतिशत गिरा है। इन जिलों में तीन मंत्री, सात सांसद और कई विधायक सीधे इस चुनाव से जुड़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में मतदान गिरने के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

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हालांकि यह भी माना जा रहा है कि पंच-सरपंच के चुनाव में और आनेवाले चरणों में मतदान प्रतिशत बढ़ेगा। राजनीति के जानकारों के अनुसार इस बार जिला परिषद और सरपंच के लिए अलग-अलग दिन मतदान हो रहा है। पिछली बार दोनों चुनाव एक साथ हुए थे। ग्रामीण इलाकों में सरपंच के चुनाव का क्रेज रहता है। इस कारण मत प्रतिशत में गिरावट आई है। हालांकि सभी राजनीतिक दल इसके भाग और गुना में जुट गए हैं।

भाजपा नौ सीटों पर सिंबल पर चुनाव लड़ रही है और दस जगहों पर समर्थित उम्मीदवार उतारे हैं। शेष स्थानों पर बिना चुनाव चिह्न के चुनाव लड़ा जा रहा है। बावजूद इसके कम मतदान होना सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि जिला परिषद चैयरमैन और ब्लॉक समिति चेयरमैन बनाने के लिए इनको पूरी ताकत लगानी पड़ेगी।
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2024 में विधानसभा चुनाव है, इसलिए सभी दल अपने सदस्यों को अधिक से अधिक जिताने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि जिलों में जिला परिषद चेयरमैन और ब्लॉक समिति चेयरमैन पदों पर कब्जा जमाया जा सके। इन पदों के माध्यम से ही गांवों में राजनीति और विकास का पहिया घूमता है। कम मतदान को लेकर राजनीतिक दल समीक्षा भी करेंगे, ताकि कारण का पता लग सके कि आखिरकार लोग घरों से निकलकर मतदान बूथ तक क्यों नहीं पहुंचे। 

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जहां पिछली बार के मुकाबले कम मतदान हुआ है, उनमें भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, नूंह, पानीपत, पंचकूला और यमुनानगर जिले शामिल हैं। भिवानी से संबंधित सांसद धर्मबीर सिंह, मंत्री जेपी दलाल, झज्जर से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, सांसद अरविंद शर्मा, जींद में विधायक मिड्डा और सांसद रमेश चंद कौशिक, पानीपत में सांसद संजय भाटिया, विधायक प्रमोद विज, विधायक महिपाल ढांडा, कैथल में बाल विकास राज्य मंत्री कमलेश ढांडा, विधायक लीला राम गुर्जर व सांसद नायब सिंह सैनी और यमुनानगर में शिक्षा मंत्री कंवर गुर्जर और सांसद रतनलाल कटारिया भी मतदाताओं का बूथों तक नहीं ला पाए।

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पंचकूला से विधायक और विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता के जिले में भी पिछली बार के मुकाबले मतदान गिरा है। हालांकि जिलों में सर्वाधिक मतदान यहां हुआ है। इसी प्रकार, नूंह क्षेत्र में वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जाकिर हुसैन और सांसद राव इंद्रजीत का प्रभाव होने पर भी कम मतदान हुआ है। 

आदमपुर उप चुनाव भी कारण
राजनीति के जानकारों का कहना है कि इस बार जिला ब्लॉक समिति में मतदान कम होने का कारण आदमपुर उपचुनाव भी रहा है। क्योंकि सभी राजनीतिक दलों ने आदमपुर में अपनी ताकत झोंक रखी है। मंत्री, सांसद और विधायकों के साथ साथ अन्य दलों ने भी अपने स्टार प्रचारकों की ड्यूटी पंचायती चुनाव की बजाए आदमपुर में लगा रही है। आदमपुर चुनाव में नेताओं द्वारा अधिक समय देने के चलते भी मतदान पर असर पड़ा है। हालांकि, बताया जा रहा है कि सरपंच और पंच के चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ने के आसार हैं।

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