रमेश खत्री का कहना है कि बर्ड फ्लू के बजाय कड़ाके की ठंड भी मुर्गियां मरने का कारण है। हो सकता है किसी बीमारी के कारण भी मुर्गियां मरी हों, लेकिन पोल्ट्री फार्म की अपनी प्रबंधन प्रणाली ठीक न होने से भी हर साल भारी सर्दी व गर्मी में बड़ी संख्या में मुर्गियां मरती रही हैं।
ठंड में फार्म के अंदर हीट न होने से सर्दी लगने पर भी मुर्गियां मर जाती हैं। उन्होंने कहा कि बर्ड फ्लू फार्म के कर्मचारियों को तो हो सकता है लेकिन ब्रॉयलर खाने वालों को नहीं, चूंकि अच्छी तरह धोने व तेज आंच पर पकाने से चिकन में विषाणु रहने का सवाल ही नहीं उठता।
मुर्गियों की सुरक्षा में ला रहे सुधार
वेंकीज कंपनी के अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि पोल्ट्री संचालकों व उत्पादकों से संपर्क स्थापित कर मुर्गियों की सुरक्षा में सुधार ला रहे हैं। पोल्ट्री फार्म में बाहर के वाहन व व्यक्ति आने पर रोक लगाई गई है। बर्ड फ्लू कौओं और बत्तखों में ज्यादा हो सकता है लेकिन मुर्गियों में इसकी संभावना कम रहती है। 95 प्रतिशत पोल्ट्री फार्म अब संगठित हैं।