फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा : बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं सरकारी स्कूलों की पहली से आठवीं तक की पुस्तकें 

Mon, 14 Jun 2021 02:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

  • खाता अपडेट न होने के कारण लगभग 50 फीसदी छात्र राशि से वंचित रह जाएंगे
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की आठवीं तक की किताबें बाजार में मिलती ही नहीं हैं
विज्ञापन
demo pic - फोटो : books
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को किताबों के लिए 200-300 रुपये मुहैया करवाने पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की आठवीं तक की किताबें बाजार में मिलती ही नहीं हैं। इसलिए राशि देने का कोई औचित्य नहीं है। इसके अलावा अनेक विद्यार्थियों के बैंक खाता अपडेट नहीं हैं जिससे 50 फीसदी विद्यार्थी इस राशि से वंचित रह जाएंगे।

विज्ञापन


हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को पुस्तकों के लिए 200 से 300 रुपये सीधे खाते में भेजने का विरोध किया है। संघ ने कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यार्थियों को अविलंब निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध करवाने की मांग की है। संघ के राज्य अध्यक्ष सीएन भारती ने कहा कि गत वर्ष मुख्यमंत्री ने कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों को निशुल्क पुस्तकें देने की घोषणा की थी, लेकिन वह मात्र घोषणा ही रह गई। 

संघ के महासचिव जगरोशन ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेवारी से भाग रही है। जब पुस्तकें उपलब्ध करवानी है तो शीघ्र स्कूलों में क्यों नहीं भेजी जा रही? लगता है सरकार ने पुस्तकों के प्रकाशन के आदेश ही जारी नहीं किए थे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से बाजार में कक्षा 1 से 8 की कोई पुस्तक नहीं मिलती। दूसरा पैसे खाते में भेजने में खाता अपडेट न होने की समस्या के कारण लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थी इस राशि से वंचित रह जाएंगे। तीसरा कक्षा वार पुस्तकों के बाजार मूल्य के बराबर राशि जारी की जाए व सरकार बाजार में पुस्तकों को उपलब्ध करवाए।
विज्ञापन


संघ मांग करता है कि सरकार 15 दिन के अंदर पुस्तकें स्कूलों को उपलब्ध करवाएं, ताकि महामारी के दौर में बच्चों को कस्बों में न भटकना पड़े। यदि किन्हीं कारणों से पुस्तकें नहीं भेज पा रहे तो कक्षा वार पुस्तकों के लागत मूल्य के बराबर राशि स्कूल एसएमसी के खाते में डालकर कहीं से भी पुस्तकों की खरीद सुनिश्चित करवाई जाए। सरकार दसवीं व बारहवीं की बोर्ड फीस भी शीघ्र विद्यार्थियों को वापस करवाए। क्योंकि, इस परीक्षा के लिए कोई पैसा खर्च ही नहीं हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें