पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुस्लिम दंपत्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यौन परिवक्वता पाने के बाद निकाह वैध है और नाबालिग होने के बावजूद लड़की को अपने पति के साथ रहने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की की कस्टडी पति को सौंपते हुए पिता की यह दलील खारिज कर दी कि विवाह योग्य आयु न होने के चलते उसे पति के साथ नहीं भेजा जा सकता।
मेवात निवासी दंपत्ति ने गत वर्ष निकाह करने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए सुरक्षा के लिए गुहार लगाई थी। उस समय लड़की की आयु को लेकर विवादित तथ्यों के चलते लड़की को आशियाना भेज दिया गया था। इसके बाद अब पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपनी पत्नी की कस्टडी मांगी थी।
इसका विरोध करते हुए पिता ने कहा कि लड़की बालिग नहीं है और ऐसे में न तो उसका विवाह वैध है और न ही उसकी कस्टडी पति को दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम धर्म में यौन परिपक्वता विवाह के लिए न्यूनतम आयु योग्यता है।
लड़की न्यूनतम योग्यता को पूरा कर चुकी है और उसका निकाग मुस्लिम रिति रिवाजों से हो चुका है। ऐसे में उसे उसके पति को सौंपना आवश्यक है। पिता द्वारा बेटी की कस्टडी की मांग को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने लड़की की कस्टडी पति को सौंपने का आदेश दिया है।