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किसानों की आत्महत्या पर मंत्री का संवेदनहीन बयान

Wed, 29 Apr 2015 01:01 PM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने फसल बर्बादी और किसानों की आत्महत्या के मामले में विपक्ष की आवाज उठने से पहले मुआवजे में बढ़ोतरी और उसके समयबद्ध वितरण का मास्टर स्ट्रोक खेला था, जिस पर उनकी ही सरकार के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने पानी फेर दिया।
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धनखड़ की एक बार फिर जुबान फिसली और उन्होंने कह दिया कि फसल बर्बादी के नाम पर आत्महत्या करने वाले किसान कायर और अपराधी हैं। उनके इस बयान से किसानों की मौत के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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खट्टर सवालों से किनारा कर गए

पत्रकार वार्ता में किसानों की आत्महत्या के संदर्भ में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से भी सवाल किए गए थे, लेकिन वे इस पूरे मामले में सफाई से किनारा कर गए, लेकिन कृषि मंत्री से जब यही सवाल किया गया तो उनकी जुबान फिसल गई।

उन्होंने किसानों की आत्महत्या को कायरता बताते हुए उन्हें कानून की भाषा में अपराधी बताया। कृषि मंत्री के ऐसा कहने के पीछे मंशा क्या है, यह तो समझ से परे है, लेकिन सीएम की पत्रकारवार्ता के तुरंत बाद ऐसे बयान से सरकार के आपसी सामंजस्य की कलई खुल गई है और विपक्ष को बैठे बिठाए मुद्दा मिल गया है।

सीएम खट्टर विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहते, जिसके लिए पूरा मुआवजा देने का ताना बाना बुन लिया है। मैदान में पूरी अफसरशाही उतार दी है। हर जिले में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाएगी।

सीएम ने दो हजार करोड़ का खाका तैयार कर लिया है, जिससे मुआवजा सब तक पहुंचे। खट्टर ने मीडिया के सामने यह भी खुलासा किया कि पिछले सालों में किस तरह से मुआवजा दिया जाता रहा है।
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