तीन कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद भाजपा ने कांग्रेस को आपातकाल पर घेरा है। विपक्षी दल पर हमलावर होने की कमान हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने संभाली। उन पर सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने सोशल मीडिया के जरिये पलटवार भी किया।
अनिल विज ने शनिवार को कहा कि एक आंदोलन पहले भी हुआ था। नेता जयप्रकाश नारायण थे, नारा संपूर्ण क्रांति का था। देश में सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बात मानने के बजाय 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लगाकर सारे नेताओं को जेल में डाल दिया था। एक आंदोलन अब हुआ।
किसानों के आंदोलन को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को बहुत आदर के साथ वापस लेने की घोषणा कर दी। कांग्रेस और भाजपा में यह अंतर है। ऐसा करने से नरेंद्र मोदी का कद और बढ़ गया है। सबको उनकी बात का सम्मान करना चाहिए ।
लांबा ने पलटवार करते हुए कहा कि किसान आंदोलन में सरकार के अड़ियल रुख के कारण 700 से ज्यादा किसानों की जान चली गई। उन्हें बचाया जा सकता था।
किसानों को गाड़ियां चढ़ाकर मौत के घाट उतार दिया गया। शायद पहले वाले आंदोलन में ऐसा नहीं हुआ। दोनों आंदोलनों में यह अंतर है। दोनों आंदोलनों में समानता सिर्फ अहंकार को लेकर है। एक साल और 700 आंदोलनकारियों की मौत के बाद ऐसे प्रवचन किसी को भी रास नहीं आएंगे।
राहुल-प्रियंका गांधी जान लें कांग्रेस का इतिहास
अनिल विज ने कहा कि नरेंद्र मोदी के कानून वापस लेने पर राहुल और प्रियंका गांधी चहक रहे हैं। उन्हें सबसे पहले अपनी पार्टी और खानदान का इतिहास जानना चाहिए। इन्हें प्रजातंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं है, क्योंकि इनकी पार्टी ने कभी उसकी लाज ही नहीं रखी।