तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद अब किसानों पर दर्ज केसों पर पेंच फंस गया है। हरियाणा में अलग-अलग जिलों में करीब 200 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें 45 हजार किसानों को आरोपी बनाया है। धाराओं की बात करें तो किसानों पर देशद्रोह से लेकर हत्या के प्रयास तक की धाराओं में मामले दर्ज हैं। कुछ किसानों की तो गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
भारतीय किसान यूनियन अब आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द कराने पर अड़ गई है। पिछले साल 24 नवंबर को अंबाला से किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी और इसके बाद ये आगे बढ़ते हुए कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत और सोनीपत तक पहुंचा।
यहां से बैरिकेड हटाकर किसानों ने जमकर हंगामा काटा था। इस दौरान कुछ पुलिस कर्मचारी और किसान भी घायल हुए थे। जैसे-जैसे किसान आगे बढ़ते रहे किसानों पर अलग-अलग जिलों में केस दर्ज होते रहे। इसके बाद भाजपा नेताओं के घेराव को लेकर हरियाणा में काफी बवाल मचा। करनाल में दो बार किसानों पर लाठीचार्ज हुआ तो हांसी और हिसार में भी किसान और प्रशासन आमने-सामने डटे रहे।
सिरसा की बात करें तो डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा की गाड़ी पर पत्थर मारने के मामले में 100 किसानों पर केस दर्ज है और इनमें से पांच किसानों को गिरफ्तार किया जा चुका है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज केस वापस होने चाहिए। इसके अलावा भी कई मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए। उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री किसानों से घर लौटने की अपील कर चुके हैं और केसों को लेकर भी आशवासन दिया है।