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आंदोलन थमते ही दिखेंगे साइड इफेक्ट, अफसरों पर गिरेगी गाज

Tue, 23 Feb 2016 02:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जाट आंदोलन ने हरियाणा सरकार की काफी किरकिरी की है। इसके थमते ही साइड इफेक्ट नजर आएंगे। अफसरों पर गाज गिरेगी। प्रदेश सरकार ने आंदोलन में संदिग्ध भूमिका रखने वाले अधिकारियों के काम की समीक्षा के आदेश दे दिए हैं।
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जिला स्तर पर अधिकारियों की समीक्षा तो होगी ही मुख्यालय स्तर पर भी कई अधिकारी आरक्षण की आग से प्रभावित होंगे। इस मामले में ढिलाई बरत रहे अधिकारियों की रिपोर्ट जल्द ही सीएम के सामने होगी। इसके बाद कार्रवाई की गाज गिरना तय है।

सूत्रों के अनुसार आरक्षण के दौरान कई स्थानों पर मूकदर्शक बनी रही हरियाणा पुलिस की समीक्षा रिपोर्ट राज्य पुलिस के मुखिया से ली जाएगी। आंदोलन की शक्ल में शुरू हुआ यह अभियान जातीय हिंसा में कैसे तबदील हुआ, इसकी भी रिपोर्ट मांग ली गई है।
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पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपद्रवियों की जल्द से जल्द पहचान कर उन पर कार्रवाई की जाए। इस पूरे प्रकरण में मुख्यालय स्तर पर बैठे अधिकारियों की रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री के पास ठीक नहीं गई है। सरकार बनने के बाद से ही अफसरशाही प्रदेश के लोगों के निशाने पर है।

सरकार के खुद के विधायक भी अफसरशाही को निशाना बनाते आए हैं, लेकिन इस आंदोलन में अफसरशाही की ढिलाई ने यह साबित कर दिया है कि अधिकारियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

अफसरों के कार्यप्रणाली की समीक्षा
हरियाणा सरकार ने जाट आंदोलन को लेकर रोहतक आईजी को बदल दिया है, लेकिन आईजी रैंक के ऊपर के अधिकारियों के कार्यप्रणाली की समीक्षा भी शुरू हो गई है। सरकार में प्रमुख पदों पर बैठे पुलिस के आला अधिकारियों तक मामले की आंच आना तय है।
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