रेल बजट से हताश हरियाणा की जनता को अब जेटली के आम बजट से उम्मीदें हैं। राज्य के किसानों से लेकर गृहणियों और उद्यामियों की निगाहें आम बजट पर टिकी हैं। हरियाणा के किसानों की आस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
जबकि स्माल मीडियम इंडस्ट्री को करों से राहत की उम्मीद है। किसानों के लिए फसल के नुकसान का होने वाला मुआवजा बड़ी मांग है। हर साल बाढ़ का पानी यमुना किनारे के गांवों को तबाह करते हैं। यमुनानगर के रादौर से लेकर छछरौली तक के किसानों की यह एक बड़ी समस्या है।
भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के मुताबिक फसलों का समर्थन मूल्य स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक होना चाहिए।
हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य के किसानों को संपन्न बना कर ही देश को संपन्न किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के हितों पर अधिक से अधिक ध्यान देना चाहिए।
एक्साइज में छूट की सीमा बढे़
चेयरमैन हरियाणा चेंबर आफ कामर्स विष्णु गोयल के मुताबिक एक्साइज में छूट की की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। अभी यह सीमा डेढ़ करोड़ सालाना है। इसे बढ़ाकर तीन से पांच करोड़ किया जाए। टैक्स के लिए बने कानून सरल होने चाहिए, जो कि दिन ब दिन पेचीदा होते जा रहे हैं। उद्योगों के लिए इनकमम टैक्स स्लैब में छूट बढ़ानी चाहिए।
सरकार एसएमई पर करे फोकस
फरीदाबाद स्माल इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव चावला के मुताबिक बजट में एसएमई पर फोकस हो। सरकार स्वरोजगार के लिए कुछ करे। इनवेस्टमेंट अलाउंस 100 करोड़ से ज्यादा पर है। कम इनवेस्टमेंट पर भी अलाउंस होना चाहिए। नया कंपनी बिल बहुत घातक है, उसे सरल किया जाए।
एसवाईएल का पानी भी है एक उम्मीद
-वर्षों से लंबित एसवाईएल का पानी हरियाणा के किसानों की बजट से पहली उम्मीद है
-मंडियों में सड़ने वाले अनाज के लिए खाद्यान्न भंडारण अहम मांग है
-स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना
-खाद और बीज पर सब्सिडी और फसल बीमा