सारे पंजाब की नजरें आज केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली पर टिक गई हैं। जेटली वीरवार को आम बजट पेश करेंगे, जोकि हर वर्ग के भविष्य की इबारत लिखेगा।
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उद्यमी हों या कारोबारी, किसान हों या आम आदमी, सभी को बजट से बहुत उम्मीदें हैं। किसी को एक्साइज ड्यूटी में छूट चाहिए, तो कोई चाहता है कि एक्साइज ड्यूटी लगने की आशंका गलत निकले।
कोई टैक्स से छूट चाहता है, तो कोई पैकेज। जेटली से उम्मीदें इसलिए भी ज्यादा हैं, क्योंकि वह अमृतसर से चुनाव लड़े थे। बजट से पहले तमाम संगठनों ने उन्हें अपनी मांगें भी भेजी हैं।
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साइकिल और निटवियर इंडस्ट्री की मांग
मैनचेस्टर ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता लुधियाना अपनी साइकिल और निटवियर इंडस्ट्री के लिए विख्यात है। बढ़ते मुकाबले ने यहां की इंडस्ट्रीज का टिकना मुश्किल कर दिया है।
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल ऑर्गेनाइजेशन के प्रधान गुरमीत कुलार कहते हैं कि साइकिल इंडस्ट्री को टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड (टफ) मिलना चाहिए। बजट से उम्मीद है कि सेकेंड हैंड मशीनरी पर सब्सिडी दी जाए। सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी भी दो फीसदी की जाए। चीन से बहुत ज्यादा आयात हो रहा है।
इसलिए साइकिल पर इंपोर्ट ड्यूटी पचास प्रतिशत की जानी चाहिए, जिससे घरेलू इंडस्ट्री को राहत मिल सके। लुधियाना की ही निटवियर इंडस्ट्री को भी बजट से उम्मीदें हैं। निटवियर क्लब के प्रधान विनोद थापर की मांग है कि एक्साइज ड्यूटी खत्म की जानी चाहिए। निटवियर इंडस्ट्री में मुकाबला बहुत बढ़ गया है।
चीन को निर्यात 80 हजार करोड़ रुपये का है, जबकि वहां से आयात 2.70 लाख करोड़ रुपये का है। चीन, श्रीलंका और बांग्लादेश में ब्याज दरें 6-9 प्रतिशत हैं, हमारें यहां 12-15 प्रतिशत हैं। इन सब को देखते हुए पॉलिसी बनानी चाहिए।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री और स्पोर्ट्स गुड्स चाहता है...
अमृतसर को टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है। अमृतसर टेक्सटाइल एसोसिएशन के प्रधान प्यारेलाल सेठ को आशंका है कि सरकार इस बार रेडीमेड गारमेंट्स पर एक्साइज ड्यूटी लगा सकती है। उन्होंने मंत्रालय को भेजे रिप्रेजेंटेशन में ऐसा न करने की मांग की है। कहा है कि यह स्माल स्केल इंडस्ट्री है और इंप्लॉयमेंट प्रोवाइडर है।
टैक्स जमा करने में बहुत उलझनें हैं। इसे सरल करके सेल्फ असेसमेंट के आधार पर टैक्स जमा करने की सुविधा दी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पंजाब को यदि पैकेज नहीं दिया जा सकता, तो सीमांत जिलों को आयकर की एक धारा के तहत छूट दी जानी चाहिए। तीन-चार इंडस्ट्री को ऐसी छूट दी गई है।
जालंधर की स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री आज चीन से बहुत पिछड़ गई है। जालंधर खेल उद्योग संघ के प्रधान केवल धीर कहते हैं कि चीन का माल घर-घर पैठ बना चुका है। इसलिए चार साल पहले लगाई गई सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी खत्म की जाए। चीन, जापान और ताईवान से बहुत माल यहां आ रहा है।
इसलिए चीनी उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई जाए, ताकि घरेलू इंडस्ट्री को ऑक्सीजन मिल सके। बीस साल से रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर की मांग की जा रही है, वह भी अब तक पूरी नहीं हुई।
एमएसएमई को चाहिए सब्सिडी, व्यापारियों की मांग
मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अनुराग अग्रवाल को उम्मीद है कि स्माल स्केल इंडस्ट्री को आधुनिकीकरण के लिए सब्सिडी का ऐलान हो सकता है।
उनकी मांग है कि छोटी इंडस्ट्री को डेढ़ करोड़ तक एक्साइज से छूट है, इसे बढ़ा कर पांच करोड़ किया जाए। यह दस साल पहले तय हुई थी। इंडस्ट्री को स्किल्ड लेबर न मिलना अहम समस्या है। इसके लिए स्कीम लाई जाए, चाहे तो इसे मनरेगा से जोड़ कर फंड दिया जा सकता है। बड़े प्रोजेक्ट शुरू हों, ताकि अर्थव्यवस्था तेज हो सके।
किसानों ने भी बजट से पहले वित्तमंत्री जेटली के सामने अपनी मांगें रखी हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि खेती लागत मूल्य कमीशन की कार्यप्रणाली बदली जानी चाहिए। केंद्र से मांग रखी है कि फसल की लागत निकाल कर उस पर 50 फीसदी लाभ किसान को दिया जाए।
किसानों को डीजल टैक्स फ्री दिया जाए। किसानों के लिए सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाए। आम लोगों को उम्मीद है कि जेटली आयकर में राहत जरूर देंगे। लोगों की मांग है कि आयकर में छूट की सीमा पांच लाख रुपये की जाए। साथ ही दो लाख रुपये तक की बचत पर छूट दी जाए।
कारोबारियों की मांग है कि वैट की जगह नेशनल जीएसटी शुरू किया जाए। पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान अमृतलाल जैन ने मांग की है कि सारे देश में टैक्स दर समान हो। राज्य, केंद्र और इंटरस्टेट के जीएसटी अलग-अलग न बनाए जाएं।
पंजाब के सीमांत जिलों को इंडस्ट्रियल पैकेज दिया जाए। माइक्रो इंडस्ट्री को सात फीसदी ब्याज पर कर्ज दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारत-पाक-अफगानिस्तान कारोबार बढ़ाने के लिए अमृतसर-लाहौर रेल ट्रैक को डबल किया जाए। सारा कारोबार कंटेनरों के जरिए हो।
आईएसपी अटारी में फुल साइज ट्रक-कंटेनर स्कैनर लगाए जाएं। खाद्य विक्रेताओं के लिए फूड सेफ्टी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन की तारीख चार अगस्त 2014 से बढ़ा कर 31 दिसंबर 2015 की जाए। दवा विक्रेताओं को राहत देते हुए आम उपयोग की दवाएं शिड्यूल-एच से हटाई जाएं। जैन ने रिटेल में एफडीआई की इजाजत न देने की मांग भी की।