करीब डेढ़ माह के बाद हरियाणा बिजली संकट से उबर गया है। पिछले एक सप्ताह से एक भी घोषित कट नहीं लगाया जा रहा है। इस समय प्रदेश में 9500 मेगावाट की मांग है और इतनी ही आपूर्ति दी जा रही है। पर्याप्त बिजली होने के चलते उद्योगों को भी रात को बिजली बहाल कर दी है, जबकि पहले रात को आठ घंटे का कट लगाया जा रहा था।
अदाणी से विवाद के चलते 1424 मेगावाट बिजली नहीं मिलने और, दूसरा खेदड़ प्लांट की 600 मेगावाट की यूनिट नंबर 2 बंद होने से हरियाणा में अप्रैल माह के शुरुआत में ही बिजली संकट गहरा गया था। समय से पहले गर्मी आने और बिजली की मांग अधिक होने के कारण कट जारी रहे। हालात इतने बिगड़े कि प्रतिदिन 2 हजार मेगावाट तक का मांग और आपूर्ति में अंतर आने लगा। ऐसे में पहले घरेलू उपभोक्ताओं की श्रेणी में कट लगाए गए, लेकिन विरोध अधिक होने के चलते इसको बदलकर उद्योगों में रात को 8 घंटे का घोषित कट लगाया गया।
अब 9 मई से नए समझौते के तहत अदाणी से 500 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है और 550 मेगावाट और जल्द शुरू होने के आसार हैं। साथ ही खेदड़ प्लांट के लिए चीन से रोटोर समेत अन्य उपकरण पहुंच चुके हैं। संभावना है कि इसी सप्ताह यह प्लांट चालू हो जाएगा। एचईआरसी ने 3 साल के लिए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की कंपनी से बिजली लेने की परमिशन दी थी, लेकिन मध्यप्रदेश की कंपनी ने इसे विड्रॉ कर लिया है और छत्तीसगढ़ से 350 मेगावाट बिजली ली जा रही है। पर्याप्त बिजली होने से इस समय उद्योगों और घरेलू श्रेणी में कोई कट नहीं लगाया जा रहा है, जबकि खेतों में 3 फेस में बिजली दे रहे हैं, जो 5 घंटे के हैं।
पीक सीजन के लिए ये है तैयारी
गर्मी के पीक सीजन के लिए भी हरियाणा ने पूरी तैयारी कर ली है। बीबीएमबी से जून के पहले सप्ताह से मिलना शुरू हो जाएगा। अदाणी ग्रुप ने 3 में से एक यूनिट चला दी है, जिससे 500 मेगावाट बिजली मिल रही है, बाकी दो यूनिट भी जल्द चालू होंगी और इससे बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी। इस समय यमुनानगर में दो और पानीपत प्लांट की तीन यूनिटें चल रही हैं।
झारखंड में प्लांट खरीदने की तैयारी
हरियाणा सरकार यमुनानगर में एक और प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा, झारखंड में भी एक प्लांट खरीदने की योजना बना रही है। हरियाणा का एक कोल ब्लॉक झारखंड में है, उसे भी इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है, ताकि वहीं से कोयला प्लांट को मिल सके। इससे कोयला परिवहन का खर्च बचेगा और खर्च कम होगा।