जाट आरक्षण आंदोलन के बाद शहर में जब उपद्रव हो रहे थे, पुलिस हाथ बांधे खड़ी थी। हालांकि इस लापरवाही का ठीकरा सेना और अर्धसैनिक बलों पर फोड़ा जा रहा है। आंदोलन के उग्र होते रूप को देखते हुए आईजी ऑफिस की ओर से प्रदेश सरकार से अर्द्धसैनिक बलों की 25 कंपनियां मांगी गईं थी, हालांकि अपने स्तर पर उपद्रवियों से निपटने का प्रयास नहीं किया गया।
प्रदेश सरकार ने तीन कंपनियों को सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए भेजा गया, लेकिन तब तक बात बिगड़ चुकी थी। उग्र भीड़ के सामने पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की ये कंपनियां बौनी साबित हुईं। इसके बाद उपद्रवियों ने रोहतक, झज्जर और सोनीपत सहित सभी जिलों में खूब उत्पात मचाया।
रोहतक में 10, झज्जर में मांगी पांच कंपनियां
आईजी ऑफिस से प्रदेश सरकार को 16 फरवरी को खत लिखा गया था। इसमें अतिरिक्त फोर्स की मांग की गई थी। सोनीपत, रोहतक और झज्जर पुलिस ने आईजी ऑफिस से अर्द्धसैनिक बलों की मांग की थी।
रोहतक पुलिस ने 10 तो झज्जर पुलिस ने अर्द्धसैनिक बलों की पांच कंपनियां मांगी थीं। इसके बाद आईजी ने सरकार को इस मांग से सूचित कर दिया था। हालांकि प्रदेश सरकार ने तीन कंपनियों को भेजा भी था।
आंदोलन को लेकर यहां हुई लापरवाही
आरक्षण आंदोलन को लेकर जगह-जगह लगे जाम से परेशान कई जातियों के लोगों ने 18 फरवरी को विरोध प्रदर्शन किया। इसी सिलसिले में वे डीसी को ज्ञापन देने जा रहे थे।
डीसी की गैर मौजूदगी में किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने न तो उनके पास जाकर ज्ञापन लेने का प्रयास किया और न ही उन्हें रोकने का। वे डीसी आवास, ऑफिस को छोड़ते हुए वकीलों के पास पहुंच गए। यहां हुए टकराव के बाद प्रदेश के हालात बिगड़ गए।
आरक्षण की मांग को लेकर 18 फरवरी को आंदोलनकारियों ने जींद बाईपास पर जाम लगा दिया। उन्होंने पुलिस की गाड़ियों को भी रोक लिया। इसके बाद एक डीएसपी और इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वाहन निकलने की गुहार लगाई।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के वाहनों को निकलने दिया लेकिन पुलिस ने अन्य वाहनों को भी निकालने का प्रयास किया। इस बात पर आंदोलनकारी भड़क गए। इसके बाद पुलिस और आंदोलनकारियों में पथराव हो गया और हिंसा भड़क गई।
नेकीराम ब्वॉयज हास्टल में हुई पुलिस कार्रवाई बड़ी भूल
18 फरवरी को ही पुलिस ने रात को हल्का बल प्रयोग करके शहर के प्रमुख चौराहों को खुलवाने का प्रयास किया। इसके बाद एक डीएसपी रात को पुलिस बल के साथ नेकीराम ब्वॉयज हास्टल में घुस गए। यहां पुलिस ने हॉस्टल में मौजूद सभी छात्रों पर बल प्रयोग किया। इसके बाद छात्रों ने अपने गांवों में पुलिस कार्रवाई की सूचना दी।
अगले ही दिन कई गांवों के करीब 600 प्रदर्शनकारी दिल्ली बाईपास होते हुए एमडीयू पहुंचे। यहां पुलिस की गाड़ियों को देखते ही उन्होंने हमला बोल दिया। पुलिस ने एग्रो मॉल में छिपकर जान बचाई। इसमें पीजीआई एसएचओ नरेंद्र पाल और कांस्टेबल नरेंद्र सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पूरे शहर में हिंसा भड़क गई। रात होते ही प्रदर्शनकारियों ने शहर में लूटपाट और आगजनी शुरू कर दी।
गुप्तचर विभाग नहीं कर सका सही आंकलन
आंदोलन को लेकर गुप्तचर विभाग का भी उदासीन रवैया सामने आया है। यदि गुप्तचर विभाग आंदोलन का सही आंकलन कर लेता तो शायद स्थिति को काबू कर लिया जाता। गुप्तचर विभाग समझ ही नहीं सका कि एक दिन बाद ही यह आंदोलन इतने बड़े स्तर पर शुरू होगा।