पंचकूला में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री खट्टर
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सरकार का अजब कारनामा। हाईकोर्ट ने गेस्ट टीचर हटाकर रेगुलर भर्ती करने को कहा, लेकिन सरकार ने उन्हें ही नियमित कर दिया। मामला हरियाणा का है। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में गैस्ट लेक्चररों के स्थान पर नियमित लेक्चरर की भर्ती करने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 10 फरवरी, 2014 को आदेश जारी किए थे। लेकिन हरियाणा शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए गेस्ट लेक्चररों को ही नियमित तौर पर भर्ती कर लिया।
इस तरह हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना के लिए दोषी करार दिए गए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्धन और हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के तत्कालीन सचिव भूपेंद्र सिंह की अपील का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस एम. जयपाल और जस्टिस स्नेह पराशर की डिविजन बेंच ने हाईकोर्ट की उस एकल बेंच को हरियाणा के मुख्य सचिव व अन्य संलिप्तों की भूमिका की जांच करके एक कम्पोजिट आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं, जो बेंच अवमानना याचिका की सुनवाई कर रही है।
हाईकोर्ट ने गत 30 मार्च को विजयवर्धन और भूपेंद्र सिंह को अवमानना का दोषी ठहराया था, जिस पर दोनों अधिकारियों ने डबल बेंच में अपील दायर की थी।
मुख्य सचिव की भूमिका की जांच की मांग
CM Khattar
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हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने अपने चार पन्ने के आदेश में लिखा कि दोनों अधिकारियों ने बेंच के समक्ष विभिन्न नोटिंग, शीट्स व पत्राचार संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया है कि उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बारे में राज्य सरकार और मुख्य सचिव को समय पर आधिकारिक तौर पर जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद मुख्य सचिव ने 1396 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियमित भर्ती का विज्ञापन जारी करने का आदेश दिया।
इसके चलते उक्त दोनों अफसरों के हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करना संभव नहीं रह गया था। डिविजन बेंच ने दोनों अफसरों के इस जवाब पर कहा है कि ऐसे हालात में अवमानना के मामले में याचिकाकर्ता दोनों अफसरों के साथ ही हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
अधिवक्ता जगबीर मलिक ने भी डिविजन बेंच से सहमति जताई, जिस पर बेंच ने उन्हें मुख्य सचिव सहित अन्य पक्षों को अवमानना मामले में पार्टी बनाने की अनुमति देते हुए कहा कि सभी पक्षों को अपने बचाव का उचित अवसर प्रदान करते हुए सिंगल बेंच एक कम्पोजिट आदेश पारित करे। इस निर्देश के साथ ही डबल बेंच ने उक्त दोनों अधिकारियों को अवमानना का दोषी मानने संबंधी 30 मार्च, 2016 को दिए अपने अंतरिम आदेश को निरस्त कर दिया।
यह है मामला
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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हरियाणा में कॉलेज कैडर के गैस्ट लेक्चररों की जगह नियमित असिस्टेंट लेक्चररों की भर्ती की मांग करते हुए राकेश कुमार द्वारा वर्ष 2011 में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट के जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने 10 फरवरी, 2014 को फैसला सुनाते हुए हरियाणा सरकार को आदेश दिए कि कॉलेज कैडर के असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर कार्यरत गेस्ट लेक्चररों की जगह नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि 15 नवंबर, 2014 तक एचपीएससी भर्ती प्रक्त्रिस्या पूरी करके इन पदों के लिए चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों की रिकमेंडेशन लिस्ट हायर एजुकेशन विभाग हरियाणा को भेज दी जाए और हायर एजुकेशन विभाग 31 दिसंबर, 2014 तक नियुक्ति का काम पूरा कर ले।
लेकिन हाईकोर्ट के इस आदेश पर आज तक पालन नहीं किया गया, बल्कि गेस्ट लेक्चररों को ही हरियाणा सरकार ने उन पदों पर नियमित कर दिया, जिस पर सुनील कुमार ने अपने अधिवक्ता जगबीर मलिक के जरिए 1 अप्रैल, 2015 को अवमानना याचिका दाखिल की थी। इस अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है और अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी।