हरियाणा सरकार ने बिल्डरों को दिए जाने वाले लाइसेंस प्रणाली पूरी तरह से बदल दी है। सरकार का दावा है कि इस प्रणाली से किसानों को उनकी जमीन का सही मूल्य मिलेगा, वहीं सरकार को ईडीसी, आईडीसी और लाइसेंस फीस से करीब 60 हजार करोड़ का रेवेन्यू आएगा।
इस नीति में बड़ी बात यह है कि अब बिल्डर 25 एक ड़ भूमि पर भी कॉलोनी काट सकेंगे। सूबे में अब तक बिल्डरों को 100 एकड़ जमीन पर प्लॉट काटने का लाइसेंस दिया जाता था। सरकार ने इस मामले में 25 से 50, 50 से 100 और 100 से अधिक एकड़ की तीन अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं।
यहां पत्रकारों के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि हाइपर और हाई पोटेंशियल जोन के लिए यह पॉलिसी बनाई गई है। जिसमें गुड़गांव-मानेसर, फरीदाबाद-बल्लभगढ़, सोहना, सोनीपत-कुंडली, पानीपत और पंचकूला-कालका, पिंजौर को शामिल किया गया है।
नई नीति किसानों और भूमि मालिकों, आवासीय भूखंडों और फ्लैट्स के खरीदारों-उपभोक्ताओं, रीयल एस्टेट डिवेलपर्स की अपेक्षाओं और सरकार के बीच सही संतुलन स्थापित करने में कारगर सिद्ध होगी। नीति के प्रावधान के तहत सरकार को किसानों की निजी भूमि का अनिवार्य अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा।
यह नीति छोटे भूमालिकों को संपूर्ण लाइसेंस प्रक्रिया, रियल एस्टेट डेवलपमेंट और विपणन तथा अपने हस्तांतरण योग्य विकास अधिकारों (टीडीआर) की बिक्री में भागीदार बनाकर उनको स्वेच्छा से भूमि को बाजारी भाव प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाएगी।
उन्होंने बताया कि पहले की नीति में केवल वही बिल्डर इन क्षेत्रों में कॉलोनी विकसित कर सकता था, जिसके पास 100 एकड़ से अधिक भूमि होती थी। गुड़गांव और फरीदाबाद की शहरी सीमा में जमीन के भाव में अत्यधिक वृद्धि से एक तरफ तो बिल्डर 100 एकड़ भूमि इकट्ठी नहीं कर सकते थे।
दूसरी तरफ छोटे किसान खुद को ठगा महसूस करते थे, क्योंकि उन्हें या तो इस बात का इंतजार करना पड़ता था कि बिल्डर उनकी जमीन बाजार भाव से भी कम दरों पर खरीदें या फिर उन्हें सरकार द्वारा अनिवार्य भू अधिग्रहण का शिकार होना पड़ता था।