हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य की ओर से साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 27 संस्कृत साहित्यकारों को विभिन्न अलंकरणों से सम्मानित किया गया। 28.86 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के रूप में वितरित किए गए। यह कार्यक्रम राजभवन में पुरस्कार वितरण समारोह में आयोजित किया गया। समारोह में हरियाणा संस्कृत गौरव सम्मान के लिए दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि व प्रशस्ति पत्र, महर्षि वाल्मिकी सम्मान और महर्षि वेद व्यास सम्मान के लिए 1.5 लाख रुपये एवं प्रशस्ति पत्र दिए गए।
इसी प्रकार महर्षि बाणभट्ट सम्मान, विद्यामार्तण्ड पण्डित सीताराम शास्त्री आचार्य सम्मान, स्वामी धर्मदेव संस्कृत समाराधक सम्मान के लिए एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही पुस्तक पुरस्कार सम्मान के तहत 31 हजार रुपये की पुरस्कार की राशि व प्रशस्ति पत्र दिए गए। साहित्यकारों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत देव भाषा है और इसके उत्थान के लिए सभी को आगे बढ़क़र काम करना चाहिए। इस अमर वाणी को बढ़ाने में आज के साहित्यकारों, कवियों और लेखकों का अहम योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने कैथल जिला के मूंदडी गांव में महर्षि वाल्मिकि संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित किया है। इससे देश व प्रदेश के युवाओं में संस्कृत भाषा के प्रति रूझान बढ़ेगा। उन्होंने इस अवसर पर साहित्य अकादमी की पत्रिका हरिप्रभा, हरिवाक् और अकादमी की स्मारिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष कंवर पाल ने कहा कि संस्कृत भाषा व्यक्ति के चरित्र को प्रदर्शित करती है। देश में यह पहली सरकार है जिसने संस्कृत और अपनी संस्कृति को बढ़ाने पर बल दिया है।
उन्होंने संस्कृत साहित्यकारों का आह्वान किया कि वे युवा पीढ़ी को आधुनिकता के अनुरूप तैयार कर देश की संस्कृति से ओत-प्रोत करें। सरकार द्वारा संस्कृत अकादमी के वेबसाइट भी शीघ्र ही तैयार की जाएगी। उन्होनें यह भी कहा कि शेष बचे साहित्यकारों को भी इसी वर्ष के अंत तक पुरस्कृत किया जाएगा।
इन्हें मिला सम्मान
राज्यपाल ने हरियाणा संस्कृत गौरव सम्मान से डॉ. मथुरादत्त पांडेय, शिवनारायण शास्त्री और आचार्य महावीर प्रसाद शर्मा को क्रमश: वर्ष 2014, 2015 और 2016 से सम्मानित किया। जबकि महर्षि वाल्मीकि सम्मान से प्रो कृष्ण शर्मा, प्रो कमला भारद्वाज तथा प्रो भीम सिंह, महर्षि वेदव्यास सम्मान से प्रो राजेश्वर प्रसाद मिश्र, डॉ. सत्यपाल शर्मा और सत्यनारायण शर्मा को, महाकवि बाणभट्ट सम्मान से डॉ. मिथिलेश शर्मा शास्त्री, हरिप्रकाश शर्मा तथा तुलाराम शर्मा को और स्वामी धर्मदेव संस्कृत समाराधक सम्मान से डॉ. राजनमान, राजेश स्वरूप तथा आचार्य वेदव्रत शास्त्री को, डॉ. हरि सिंह को पुस्तक पुरस्कार से डॉ. बलवंत सिंह और सूरज कुमार, डॉ. सत्यपाल शर्मा, डॉ. धर्मबीर कुंडू और डॉ. मिथिलेश शर्मा को क्रमश: वर्ष 2014, 2015 और 2016 के लिए सम्मानित किया गया।
वर्ष 2015 के लिए ओमप्रकाश कौशिक तथा वर्ष 2016 के लिए आचार्या विद्यावती को गुरु विरजानन्द आचार्य सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, वर्ष 2014 के लिए सुमन शर्मा तथा वर्ष 2015 के लिए प्रमोद शर्मा को विद्यामार्तण्ड पं. सीताराम शास्त्री आचार्य सम्मान से सम्मानित किया गया। पं. युधिष्ठिड्ढर मीमांसक आचार्य सम्मान से आचार्या राजवंती (2015) तथा आचार्य वेदव्रत शास्त्री (2016) को सम्मानित किया गया। इस दौरान संस्कृत अकादमी द्वारा राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य, विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल, सूचना, जनसंपर्क एंव भाषा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश खुल्लर समेत अन्य मौजूद थे।