सीएम ने कहा कि पीपीपी में 72 लाख से अधिक परिवार यानी एक करोड़ 87 लाख से अधिक लोगों का डाटा सरकार ने एकत्रित किया है। लोगों की आय प्रमाणित करने के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां बनाई हुई हैं। पीपीपी का फायदा यह हुआ कि 9 लाख 60 हजार से अधिक ऐसे परिवार सामने आए, जो गलत तरीके से बीपीएल सुविधाओं का लाभ ले रहे थे। परिवार पहचान-पत्र लागू होने के बाद 12 लाख 46 हजार से अधिक नये परिवारों को बीपीएल कैटेगरी में भी शामिल किया है।
सीएम ने बताया कि 1 लाख 32 हजार ऐसे परिवार मिले हैं, जो आयरक रिटर्न भर रहे हैं, ऐसे में उनका नाम कटा है। 3 लाख 44 हजार परिवारों की सालाना आय 1 लाख 80 हजार से अधिक मिली है। 1 लाख 95 हजार ऐसे लोग हैं, जो प्राइवेट सेक्टर में नौकरी कर रहे हैं। 41 हजार 479 लोगों के नाम बीपीएल से इसलिए काटे गए हैं क्योंकि वे सरकारी या कांट्रेक्ट कर्मचारी थे। जिन किसानों की सालाना सेल 4 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें भी बीपीएल से बाहर किया है। 2119 सरकारी पेंशनर थे, जो बीपीएल कैटेगरी में थे। इसी तरह से उन परिवारों के नाम काटे हैं, जिनकी सालाना बिजली बिल 9 हजार रुपये से अधिक है।
सीएम ने कहा कि बीपीएल कैटेगरी से नाम कटने के बाद सरकार के पास 3 लाख 41 हजार शिकायतें आई हैं। इनमें से 1 लाख 70 हजार शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। एक लाख 64 हजार के लगभग शिकायतों पर कार्रवाई चल रही है। इसके लिए सर्वे करवाया जा रहा है।
कुंडू ने उठाया किसानों का मुद्दा
महम विधायक बलराज कुंडू ने चार लाख रुपये तक की फसल सेल करने वाले किसानों की आय 1 लाख 80 हजार से अधिक आंकने पर सवाल उठाए। उनकी बात पर सीएम ने कहा कि सरकार इसमें बदलाव कर सकती है। इस पर विचार चल रहा है। नौ हजार रुपये बिल वाले लोगों को भी बीपीएल से बाहर करने पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। सीएम ने कहा कि एक शिकायत आई कि एक आदमी कपड़े प्रेस करने का काम करता है। उसने शिकायत दी है कि मैं वैसे तो बीपीएल हूं चूंकि मेरा काम प्रेस का है इसलिए मेरा बिजली बिल अधिक आता है। उन्होंने माना कि ऐसे में उसका बिल तो अधिक आएगा ही। साथ ही यह भी कहा ऐसे मामलों में सरकार संशोधन करने पर विचार कर रही है।