हरियाणा सरकार ने रोडवेज के हड़ताली कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने पांच सितंबर की हड़ताल से हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई कर्मचारी नेताओं से करने का निर्णय लिया है। सरकार के आकलन के अनुसार हड़ताल से करोड़ों रुपये का नुकसान परिवहन विभाग को हुआ है। रोडवेज के कर्मचारी नेताओं ने कुछ जिलों में चार सिंतबर शाम से ही चक्का जाम कर दिया था, जबकि पांच सितंबर को भी दोपहर तक अधिकतर बस सेवा बाधित रही।
इस कारण पहले से साढ़े छह सौ करोड़ का घाटा झेल रही रोडवेज को भारी वित्तीय चपत लगी। सरकार अब इस घाटे की भरपाई रोडवेज के कर्मचारी नेताओं से करेगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन विभाग धनपत सिंह ने इस संबंध में सभी डिपो महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। महाप्रबंधकों को पत्र भेजकर कहा गया है कि गिरफ्तार नेताओं और न्यायिक हिरासत के बाद रिहा किए कर्मचारी नेताओं पर भारी पेनाल्टी लगाई जाए।
इसके अलावा हड़ताल को लेकर जिन कर्मचारी नेताओं ने अन्य कर्मचारियों को उकसाया और भड़काया उन पर भी कार्रवाई करें, साथ ही भारी पेनाल्टी लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। धनपत सिंह ने महाप्रबंधकों को यह कार्रवाई सात दिन के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। धनपत सिंह ने पत्र में साफ किया है कि सरकार के एस्मा के तहत कड़ी कार्रवाई करने की हिदायत है।
सरकारी कार्य में डाली कर्मचारियों ने बाधा
एसीएस धनपत सिंह ने पत्र में लिखा है कि रोडवेज कर्मचारियों ने सरकारी काम में बाधा डाला है। सरकारी विरोधी नारे लगाए हैं। उनके इस कृत्य से जनता की नजरों में सरकार व परिवहन विभाग की छवि धूमिल हुई है। हड़ताल के कारण लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ी। परिवहन विभाग को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है।
इसे देखते हुए गिरफ्तारी के बाद हिरासत में चल रहे कर्मचारियों को निलंबित करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि रिहा हो चुके कर्मचारियों को भी ड्यूटी पर वापस नहीं लिया जाएगा। धनपत सिंह के अनुसार हड़ताली कर्मचारियों को चार्जशीट भी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी।
कार्रवाई के बाद मुख्यालय को नाम सहित भेजना होगा रिकॉर्ड
एसीएस धनपत सिंह ने डिपो महाप्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने डिपो के उन कर्मचारियों का पूरा विवरण परिवहन मुख्यालय को भेजें, जिन पर एस्मा के तहत कड़ी कार्रवाई की गई है। जिन कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, उन्हें किसी सूरत में ड्यूटी पर न लें।