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आम जनता पर मंहगाई की मार...आलू और टमाटर 40 के पार

Sat, 08 Sep 2018 10:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सब्जियों के रेट एक बार फिर आसमान छूने लगे हैं। खासकर आलू और टमाटर के रेट तेजी से ऊपर जाने से इस खाने की थाली का स्वाद बिगड़ गया है। सेक्टर-26 की मंडी में पहाड़ी आलू का फुटकर रेट 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है जबकि देसी आलू 20 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। वहीं, रिहायशी इलाकों में रेहड़ी पर कहीं-कहीं पहाड़ी आलू 50 रुपये किलो तक बिक रहा है। टमाटर भी दिनों दिन लाल होता जा रहा है।
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शुक्रवार को मंडी में टमाटर 30 रुपये प्रति किलो जबकि रिहायशी इलाकों में 40 रुपये प्रति किलो तक बिका। बता दें कि अगले माह से नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। इसके साथ ही फेस्टिवल सीजन भी शुरू हो रहा है। ऐसे में लोगों को महंगी सब्जियां खाने को मजबूर होना पड़ेगा। आढ़ती और विक्रेता आलू के रेट और बढ़ने की उम्मीद जता रहे हैं।

विक्रेताओं के अनुसार, बारिश के कारण आलू की सप्लाई कम हो गई है जबकि मांग ज्यादा है। प्याज भी 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। इस समय कोई भी सब्जी ऐसी नहीं है जो कि 20 रुपये किलो से कम हो। मूली का रेट 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। जबकि हरी मटर इस समय 120 रुपये प्रति किलो के रेट से बिक रहा है। सब्जियों में इस समय लौकी सबसे सस्ती है, जिसकी कीमत 20 रुपये प्रति किलो है।
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आसमान पर सब्जियों के रेट
सब्जियां रेट (प्रति किलो)
अदरक 100 रुपये
मूली 40 रुपये
शिमला मिर्च 60 रुपये
अरबी 40 रुपये
बैंगन 40 रुपये
बंद गोभी 25 से 30 रुपये
बिन्स 50 रुपये
चुकंदर 40 रुपये
भिंडी 40 रुपये
धनिया 150 रुपये
गाजर 40 रुपये
करेला 50 रुपये
खीरा 50 रुपये
लहसून 40 रुपये
हरी मिर्च 40 रुपये
तरोई 40 रुपये
नींबू 80 रुपये
पालक 30 रुपये
फूल गोभी 60 रुपये

लोकल सब्जियों के आने में लगेगा समय
विक्रेताओं के अनुसार इस समय अधिकतर सब्जियां पहाड़ से आ रही हैं, जिनमें बंद गोभी, टमाटर, पहाड़ी खीरा, शिमला मिर्च, बिन्स, अदरक, मूली, फूल गोभी, हरी मटर, आलू, धनिया और मिर्च शामिल हैं, इसलिए रेट ज्यादा हैं। जब तक लोकल सब्जियां नहीं आती हैं तब लोगों को महंगी सब्जियां खानी पड़ेंगी। अगले माह तक ही लोकल सब्जियों की पैदावार आनी शुरू होगी। इस समय लोकल सब्जी में केवल लौकी और भिंडी ही आ रही है।

मंडी से ही होती है पंचकूला और मोहाली सप्लाई
सेक्टर-26 मंडी से ही चंडीगढ़ के अलावा पंचकूला और मोहाली से सब्जियों की सप्लाई परचून में बिकने के लिए होती है। वहीं प्रशासन की ओर से सब्जियों के भाव पर नजर रखने का कोई सिस्टम नहीं है। सेक्टर-26 मंडी के सब्जी विक्रेता प्रवीण कुमार का कहना है कि सब्जियों के रेट महंगे इसलिए हैं कि मार्केट में लोकल सब्जियां नहीं हैं। अधिकतर सब्जियां पहाड़ से आ रही हैं। सबसे ज्यादा रेट पहाड़ी आलू के बढ़े हैं। पिछले सप्ताह पहाड़ी आलू का 15 से 20 प्रति किलो था जो कि अब 40 से 50 रुपये किलो पहुंच गया है।


आलू के रेट बढ़ने से गृहणियाें की चिंता बढ़ी
आलू का इस्तेमाल हर घर में रोजाना ही होता है। ज्यादातर लोग पहाड़ी आलू ही खाते हैं क्योंकि देसी आलू मीठा होता है। अब आलू 40-50 रुपये बिकेगा तो घर का बजट कैसे चलेगा। आलू कभी इतना महंगा नहीं होता। प्रशासन को जरूरी कदम उठाने चाहिए ताकि सब्जियों की महंगाई कम हो। -सत्या देवी

हर कोई ताजी सब्जियां लेना चाहता हैं। कई बार मंडी नहीं जा पाने पर घर के बाहर आने वाली रेहड़ियाें से सब्जी लेनी पड़ती है। कल जब आलू लेने लगी तो बेचने वाले ने 40 रुपये किलो के हिसाब से दिए। आलू रोज इस्तेमाल होता है। ऐसे में घर का बजट बिगड़ रहा है। सर्बजीत कौर, सेक्टर -40

सुबह सप्ताह में कई बार आलू के परांठे बनाने होते हैं। इसके अलावा लगभग हर रोज आलू का इस्तेमाल किसी न किसी सब्जी में होता है। घर में हम दो या तीन किलो आलू तो खरीद कर रखते हैं। आज जब शाम को आलू खरीदने गई तो 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिला। इससे झटका सा लगा। आलू इतना महंगा मिलेगा तो घर कैसे चलेगा। - कविता सैनी
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