कृषि बिलों को लेकर चल रहे आंदोलन के दौर में हरियाणा सरकार का लक्ष्य प्रदेश के करीब 16.50 लाख किसान परिवारों को साधना है। आंदोलन के बावजूद आश्वस्त प्रदेश सरकार का फोकस इन्हीं किसानों पर है। प्रदेश सरकार का मानना है कि भले ही किसान अभी विपक्ष व कथित किसान नेताओं के बहकावे में आकर इन कृषि बिलों का विरोध कर रहे हैं, मगर इन कृषि बिलों में सुधार के बाद इनका दीर्घकालीन फायदा जब किसानों को होगा, तो किसान खुद इन कृषि बिलों का समर्थन भी करेंगे।
इसी को लेकर प्रदेश सरकार अगले दो साल को सामने रखते हुए किसानों के हित के लिए कृषि विभाग के साथ मंथन में जुटी हुई है। 2022 तक ये दो साल वो लक्ष्य है, जब सरकार को किसानों की आय दोगुनी करनी है। इसलिए प्रदेश सरकार करीब 6 हजार करोड़ से अधिक लागत से कृषि संबंधी ऐसी योजनाएं तैयार कर रही है, जिसका लाभ किसान और किसानी को हो। दूसरी ओर, प्रदेश में किसान उत्पादक संघों के तहत प्रदेश में किसानों की बहुत से टोलियां ऐसी हैं, जो आज भी लीक से हटकर अपने अंदाज में खेती करती है।
ये किसान सामान्य किसानों से अपेक्षाकृत अच्छा कमाते हैं। सूबे में होने वाली 311 कांट्रेक्ट फार्मिंग भी ऐसे ही किसानों द्वारा की जाती है। सूत्रों ने बताया कि सरकार इन किसानों को प्रगतिशील किसान मानती है। अब ऐसे ही प्रगतिशील किसानों को बतौर ‘कृषि एंबेसडर’ फील्ड में उतारने पर विचार किया जा रहा है। प्रगतिशील किसानों की ये टोलियां एक मिसाल के रूप में सामने आएंगी और किसानों को बताएंगी कि किस तरह अन्य किसान भी उनकी तरह अपनी खेतीबाड़ी के तरीकों को बदलें और अपनी फसल की मार्केटिंग का गुर भी सीखें।
इसके लिए डिजिटल फ्लेटफार्म एक बड़ा माध्यम हैं और ऐसा कर वे अपनी फसल से बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। इन प्रगतिशील किसानों के माध्यम सरकार किसानों को ये भी बताने की कोशिश करेगी कि कैसे इन प्रगतिशील किसानों ने सरकारी कृषि नीतियों का लाभ उठाकर अपनी आय को बढ़ाया और ऐसा अन्य सभी किसानों के लिए भी संभव है।
सरकार वीडियो से दे रही विपक्ष का जवाब
कृषि बिलों पर लगातार विपक्षी दल प्रदेश सरकार पर हमलावर है। सरकार का कहना है कि विपक्षी ही प्रदेश के किसानों में भय का भ्रम का माहौल बना रहे हैं। इसी के चलते सरकार ने विपक्ष का जवाब वीडियो से देने का निर्णय लिया है। सरकार की एक विशेष टीम ने ग्राउंड स्तर पर कैसे ऐसे वीडियो तैयार किए हैं। जिन्हें सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर खूब वायरल किया जा रहा है।
इसी के बूते सरकार इन कृषि बिलों का महत्व किसानों को समझाते हुए विपक्ष को आइना दिखाना चाहती है। इन वीडियो के जरिए सरकार किसानों को बता रही है कि कृषि कानून को लेकर लगातार विपक्ष किसानों के बीच भ्रम फैला रहा है। कांग्रेस एक राग अलाप रही है कि मंडियों में एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही है। जबकि सच यह है कि हरियाणा में लॉकडाउन के बावजूद मंडियों में फसल की रिकार्ड खरीद की गई।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि मंडियों में एमएसपी पर 71.89 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। एमएसपी पर ही 7.46 लाख मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई। आगामी 1 अक्टूबर से खरीफ फसलों को खरीदने के लिए प्रदेश सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। इस बार भी फसलों को एमएसपी पर ही खरीदा जाएगा। धान, बाजरा, मक्का व मूंग इन चारों फसलों का एक-एक दाना एमएसपी पर खरीदा जाएगा। कोई कठिनाई नहीं आने दी जाएगी।
मंडियों में फसल खरीद को लेकर तैयारियां कर ली गई है। मुख्यमंत्री के आदेश हैं कि खरीफ फसलों का एक-एक दाना पूरे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। किसानों की सुविधा के लिए खरीद केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई गई है। मंडियों में किसानों को खरीद के दौरान किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए विशेष तौर पर कृषि अफसरों की भी ड्यूटियां लगाई गई हैं।
- संजीव कौशल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग