पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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टेक्निकल बिड के जरिये आवेदक को स्टेट ट्रांसपोर्ट के निदेशक के नाम एक डिमांड ड्राफ्ट बनाना था। उसके बाद आवेदक को तत्काल टेक्नीकल बिड में ड्राफ्ट की जानकारी के साथ आवेदन करना था। याचिकाकर्ता का कहना था 21 दिसंबर आवेदन की अंतिम तिथि है, ऐसे में दोनों प्रक्रिया के बीच कुछ समय दिया जाना जरूरी है। जो चंडीगढ़ में है वह तो इसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन जो दूर से हैं उन्हें दोनों में एक साथ आवेदन में परेशानी होगी। इससे राज्य सरकार को ही नुकसान होगा क्योंकि इस प्रक्रिया से प्रतियोगिता कम होगी और सरकार को मंहगे दामों में बस लेने पड़ेगी।
पारदर्शी और प्रतियोगी तरीका जरूरी
गुरुवार को हाई कोर्ट ने इस याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर शुक्रवार सुबह जवाब दिए जाने के आदेश दिए थे। शुक्रवार सुबह दस बजे हरियाणा सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया सही है। हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर क्यों अर्नेस्ट मनी को ऑफ लाइन रखा गया है। इसके पक्ष में सरकार ने दलीलें दी जिसे हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि ऑफ लाईन की शर्त हमारी समझ के बाहर है। कोर्ट ने कहा कि टेंडर पारदर्शी तरीके से प्रतियोगी तरीके से हो यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
नए सिरे से जारी होगा टेंडर
हाईकोर्ट की फटकार के बाद इस पर हरियाणा सरकार ने कुछ समय दिए जाने की अपील की जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई दो घंटे के लिए टाल दी। हरियाणा सरकार के वकील ने सरकार से राय लेने के बाद हाईकोर्ट को सूचित किया कि वे यह टेंडर वापस लेने जा रहे हैं और नए सिरे से टेंडर जारी किया जाएगा जिसमें ऑन लाइन पेमेंट को स्वीकार किया जाएगा।