सरकार ने ये किए बदलाव
- सात साल के बॉन्ड एग्रीमेंट की समय सीमा सात साल से घटाकर पांच वर्ष की
- इस पांच वर्ष में पीजी की पढ़ाई को भी शामिल किया है, उनके लिए समय सीमा दो साल होगी
- बॉन्ड राशि 40 लाख से घटाकर 30 लाख की। इसमें से संस्थान की फीस से छूट रहेगी
- बॉन्ड राशि में लड़कियों के लिए इसमें 10 फीसदी की छूट दी गई है
- एमबीबीएस कर रहे किसी छात्र के साथ कोई अनहोनी होने पर परिवार बॉन्ड राशि भरने के लिए बाध्य नहीं होगा
विद्यार्थियों की ये हैं मांगें
- डिग्री पूरा होने के दो माह के अंदर नौकरी दी जाए
- बॉन्ड अवधि एक साल की हो
- बॉन्ड तो तोड़ने वाले के लिए राशि 20 लाख रुपये हो
- नौकरी नहीं मिलने वालों को बॉन्ड से मुक्त किया जाए
यहां फंसा हुआ है पेंच
सरकार ने पढ़ाई के बाद एक साल के भीतर एमबीबीएस छात्र को सरकारी नौकरी (अनुबंधित) दी जाएगी। इसके साथ ही यदि कोई छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद प्राइवेट नौकरी करता है और उसका वेतन सरकार द्वारा मेडिकल ऑफिसर को दिए जा रहे वेतन से कम है तो उसे तब तक बॉन्ड की राशि नहीं देनी होगी जब तक उसका वेतन मेडिकल ऑफिसर के वेतन के बराबर या उससे ज्यादा नहीं होता। ऐसी स्थिति में सरकार उसे अनुबंधित नौकरी ऑफर करेगी। वहीं, विद्यार्थी इस मांग पर अड़े हैं कि सरकार सभी विद्यार्थियों को दो माह के अंदर सरकारी या कांट्रेक्ट पर नौकरी दे। जिनको सरकार नौकरी नहीं दे पाती है, उनको बॉन्ड से मुक्त किया जाए लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है।
अमर उजाला ने 25 नवंबर को कर दिया था खुलासा
बॉन्ड पॉलिसी को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच का रास्ता पहले की तैयार कर लिया गया था। इस संबंध में अमर उजाला ने 25 नवंबर के संस्करण में इसका खुलासा किया था। मुख्यमंत्री के रणनीतिकारों ने देश के सभी राज्यों की पॉलिसी का अध्ययन करने के बाद पाया था कि हरियाणा की पालिसी सबसे सख्त है और इसमें समय अवधि और राशि अधिक है। इसलिए उन्होंने बॉन्ड राशि को 40 लाख रुपये से घटाकर 25 से 30 लाख करने, समय अवधि 7 साल से कम कर 5 साल करने समेत अन्य सुझाव दिए थे।
एमबीबीएस विद्यार्थियों ने निकाला रोष मार्च
बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में बुधवार को पीजीआई रोहतक में एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने रोष मार्च निकाला। भूख हड़ताल भी जारी है। भगत फूल सिंह (बीपीएस) महिला मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस की छात्राओं ने भी गोहाना में जाकर विरोध प्रदर्शन किया।
विद्यार्थियों की मांग पर पालिसी में कई संशोधन किए हैं। इन संशोधनों से अधिकतर विद्यार्थी सहमत हो गए हैं, इक्का दुक्का लोग नहीं माने हैं। मेडिकल के विद्यार्थियों और हरियाणा के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पालिसी बनाई गई है, इसलिए अब विद्यार्थियों को हड़ताल खत्म कर देनी चाहिए। मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा।
सरकार की ओर से बॉन्ड पॉलिसी में किए गए किसी भी संशोधन पर आंदोलनकारी विद्यार्थी सहमत नहीं है। प्रतिनिधिमंडल गुरुवार सुबह रोहतक में धरना दे रहे विद्यार्थियों के बीच में सरकार के प्रस्ताव को रखेगा। विद्यार्थियों की सलाह पर ही आगामी फैसला लिया जाएगा। फिलहाल आंदोलन जारी है। हमें हर हाल में नौकरी की गारंटी चाहिए, जिसे नहीं मिलेगी, उसे बांड से मुक्त किया जाए। -डॉ. अंकित गुलिया, प्रधान, रेजिडेंट एसोसिशन, पीजीआई रोहतक।