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Haryana: फर्जी पौधरोपण के लिए सरकार ने बिठाई जांच, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट, गड़बड़ी मिलने पर नपेंगे अधिकारी

Sun, 26 Nov 2023 03:33 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंड़ीगढ़

सार

सरकार के गोपनीय विभाग को जानकारी मिली थी कि इस बार बड़े स्तर पर पौधे लगाने में कोताही बरती गई। इसी कारण वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 में हुए पौधरोपण और सरकारी नर्सरियों के कार्यों को लेकर जांच कराई जा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा में पौधरोपण यानी पौधे लगाने में हो रही फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने जांच बिठा दी है। सरकार ने पिछले तीन साल में हुए पौधरोपण और नर्सरी के कार्यों की भौतिक जांच के आदेश दिए है। इसके लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सभी 22 जिलों के लिए अलग-अलग अधिकारियों की ड्यूटी लगाई। इन सभी को आगामी 15 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी।

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सूत्रों के अनुसार, सरकार के गोपनीय विभाग को जानकारी मिली थी कि इस बार बड़े स्तर पर पौधे लगाने में कोताही बरती गई। इसी कारण वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 में हुए पौधरोपण और सरकारी नर्सरियों के कार्यों को लेकर जांच कराई जा रही है। विभाग ने जांच रिपोर्ट के लिए प्रोफार्मा दिया है।

इनमें वन मंडल के नाम, रेंज, ब्लाक और बीट का नाम लिखे जाने सहित भौतिक जांच की तिथि और स्कीम का नाम अनिवार्य है। लगाए गए कुल पौधों की संख्या, भौतिक जांच के दौरान जीवित पौधों की संख्या, सफलता प्रतिशत, गड्डों का माप, आकार, पौधों की प्रजाति, पौधों की सुरक्षा के साथ साथ नलाई और गड़ाई की स्थिति भी लिखनी होगी। इस बार वन विभाग ने प्रदेशभर में करीब 2 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था। इनमें से 60 लाख पौधे सामाजिक संस्थाओं ने लगाने थे। अमर उजाला लगातार फर्जी पौधरोपण के मामले को प्रमुखता से उठाता रहा है।
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जांच एवं मूल्यांकन विंग नहीं, डीएफओ करेंगे जांच
जांच के लिए जिलों में तैनात वन मंडल अधिकारियों को एक दूसरे के जिले की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, जांच के लिए विभाग में पहले ही अलग से जांच एवं मूल्यांकन विंग स्थापित हैं, लेकिन भौतिक जांच का कार्य मूल्यांकन विंग न सौंपकर एक दूसरे जिले में तैनात डीएफओ को ही अन्य जिले की जिम्मेदारी देने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मोरनी में आया था 4 करोड़ का घोटाला
पिछले साल मोरनी वन मंडल में पौधरोपण के नाम पर 4 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। यहां 750 हेक्टेयर में साढ़े आठ लाख पौधे लगाने थे। वन विभाग की जांच एवं मूल्कांकन टीम ने जांच के दौरान यह रिपोर्ट सरकार को दी थी। साथ ही इस मामले की विजिलेंस से जांच कराने के लिए भी सिफारिश की थी। इसके अलावा, यमुनानगर, अंबाला समेत अन्य जिलों में भी गड़बड़ी की रिपोर्ट सरकार के पास पहुंची थी।

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