हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। (फाइल फोटो)
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सीएम मनोहर लाल की दखल के बाद से बिजली चोरी के खिलाफ चलाए अभियान से उपभोक्ताओं के साथ-साथ निगम अधिकारियों में खलबली मची हुई है। अभियान के दौरान मात्र दो दिन में प्रदेश में बिजली चोरी के 2733 मामले पकड़े गए और करीब 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया ।
जांच के दौरान यह बातें सामने आई कि उद्योगों के सात घरों में बिजली निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से चोरी कराई जा रही थी। यह भी इनपुट मिला था कि कुछ अधिकारियों ने तो छापे के दौरान ही संबंधित व्यापारियों को फोन कर इसकी सूचना भी दी थी। इस मामले को लेकर विस्तृत जांच में बिजली निगम के कई अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल पाया गया है। विभाग की ओर से सबूतों के आधार पर लिस्ट तैयार कर ली गई है। संभावना है कि जल्द ही इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
सरकार को पहले से ही इनपुट मिल रहे थे कि इंडस्ट्री संचालक निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर बिजली चोरी कर रहे हैं। इसको लेकर पहले पूरी मैपिंग की गई और फिर अचानक दो दिनों तक छापे डाले गए। छापे से पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल को तमाम जानकारी दी गई और उनकी मंजूरी के बाद ही इस अभियान को अंजाम दिया गया। सबसे पहले औद्योगिक शहरों गुरुग्राम, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, रेवाड़ी और हिसार में चोरी पकड़ो अभियान चलाया गया। टीमों को इसमें सफलता भी मिली।
इस दौरान चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि कई लाखों और करोड़ों रुपये के डिफाल्टर उद्योगपतियों ने दूसरे कनेक्शन ले रखे थे। इसमें भी निगम के अधिकारियों की संलिप्त होने की आशंका है। निगम के सूत्रों का दावा है कि करीब एक दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों के नामों की लिस्ट तैयार हो गई है। ये लिस्ट सीएम के पास भेजी जाएगी और इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
जारी रहेगा चोरी पकड़ो अभियान : सीएम
मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि दो दिन में करीब 200 करोड़ की बिजली चोरी पकड़े जाने की संभावना है। हमारा लक्ष्य लाइनलास 32 से 15 प्रतिशत तक लाने का है। इसको लेकर बिजली चोरी रोकने के लिए भविष्य में भी अभियान जारी रहेगा और किसी भी सूरत में चोरी बर्दास्त नहीं की जाएगी।