यौन उत्पीड़न प्रकरण में मुख्य गवाह पर हमले के मामले में नारायण साईं की नियमित जमानत की मांग का विरोध करते हुए हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया है। सरकार ने कहा कि अभी नारायण साईं पर 3 मामले लंबित हैं और ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
सरकार के जवाब के बाद नारायण साईं के वकील ने इस मामले में जवाब देने के लिए कुछ समय की मांग की। हाईकोर्ट ने साई के वकील को समय देते हुए मामले की सुनवाई नवंबर माह तक स्थगित कर दी। हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि मुख्य गवाह चावला पर हमले का आरोपी साफ कह चुका कि उसको नारायण साईं ने मारने के लिए हायर किया था।
ऐसे में अगर नारायण साईं को जमानत दी जाती है तो वह जांच को प्रभावित कर सकता है। अभियोजन पक्ष के अनुसार आसाराम के बेटे नारायण साईं ने दो बहनों का यौन शोषण किया था। इस मामले में पानीपत निवासी महेंद्र चावला को मुख्य गवाह बनाया गया था। हरियाणा पुलिस ने चावला को सुरक्षा भी मुहैया करवाई थी। इस दौरान पिछले साल 13 मई को बाइक सवार दो अज्ञात युवक चावला के घर में घुस गए और फायरिंग कर फरार हो गए थे। इस घटना में महेंद्र चावला घायल हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
पुलिस को दिए बयान में चावला ने आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं के खिलाफ हमला करवाने का आरोप लगाया था। उसने कहा कि बाप व बेटा नहीं चाहते कि वह उनके खिलाफ कोर्ट में गवाही दे। इसी मामले में याचिका दाखिल करते हुए नारायण साईं ने कहा कि यौन उत्पीड़न मामले में गवाह महेंद्र चावला पर हमले के मामले में उन्हें फंसाया गया है। इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए उन्हें रेगुलर बेल दी जाए।