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मझधार में सरकार : इधर आंदोलनरत अन्नदाता, उधर प्रगतिशील किसान, इस बीच आया खेमका का सुझाव

Mon, 14 Dec 2020 02:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
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किसान आंदोलन - फोटो : पीटीआई
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नए कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और आंदोलनरत किसानों के बीच गतिरोध कम होने के बजाए बढ़ता जा रहा है। किसान संगठन अपनी मांगों पर अटल हैं और टस से मस होने को तैयार नहीं। इससे आंदोलन लंबा खिंचता जा रहा है।

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सरकार भी अब मझधार में है, चूंकि एक तरफ धरने पर डटे अन्नदाता हैं तो दूसरी तरफ प्रगतिशील किसान। नए कानूनों के पक्ष में प्रगतिशील किसानों के आ खड़े होने व आंदोलन की चेतावनी देने से परिस्थितियां बदल गई हैं। आधुनिक तकनीक व नई नीतियों के सहारे आगे बढ़ने का दम भर रहे प्रगतिशील किसानों को भी सरकार नजरअंदाज करने को तैयार नहीं है।

सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला आंदोलन को खत्म कराने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। दुष्यंत ने तो 48 घंटे में समाधान निकलने की बात भी कही है, लेकिन किसान संगठनों के तेवर नरम होने के बजाय और तीखे होते जा रहे हैं। बावजूद इसके डिप्टी सीएम दुष्यंत को उम्मीद है कि जल्दी ऐसा रास्ता निकलेगा, जिससे आंदोलन खत्म होगा व धरने पर बैठे बुजुर्ग, नौजवान किसान, बच्चे व माताएं, बहनें घर लौटेंगे।
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प्रगतिशील किसानों के साथ आने से बढ़ा सरकार का हौसला
हरियाणा की गठबंधन सरकार पर अगर किसान आंदोलन का दबाव है तो प्रगतिशील किसानों के नए कानूनों के पक्ष में खड़े होने से भाजपा-जजपा का हौसला भी बढ़ा है। अब सरकार अन्य किसान संगठनों को भी यही समझाना चाह रही है कि नए कृषि कानून उनके लिए आर्थिक तरक्की के द्वार खोलेंगे।

ठंड में डटे किसानों को सरकार के निर्णय का इंतजार : बैंस
भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस कहना है कि कड़ाके की ठंड में डटे किसानों को केंद्र सरकार के निर्णय का इंतजार है। सरकार लिखित में दे कि कानून वापस ले रहे हैं, किसानों का आंदोलन खत्म हो जाएगा। इतनी ठंड में कोई भी किसान सड़कों पर रात नहीं गुजारना चाहता, उसे अपनी जमीन व किसानी खतरे में दिखाई दे रही है।

खेमका ने सुझाया आंदोलन खत्म करने का तरीका
आईएएस अशोक खेमका ने किसान आंदोलन खत्म करने का उपयुक्त तरीका सुझाया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि केंद्र सरकार को एमएसपी का लाभ सभी राज्यों में समान रूप से बांट देना चाहिए। बाकी का बोझ राज्य सरकारों का हो। राज्य सरकारें अपने किसानों को उनकी जरूरत अपनी क्षमता के हिसाब से एमएसपी की गारंटी दें। इससे एमएसपी का विकेंद्रीकरण होगा।

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