हरियाणा में जल जीवन मिशन को लेकर आगे बढ़ रही सरकार ने अब फैसला लिया है कि प्रदेश के गांवों में इस परियोजना के तहत जितने भी पेयजल योजनाएं तैयार होगी, उनकी लागत में दस फीसदी हिस्सा ग्रामीणों का होगा। ये दस फीसदी हिस्सा कौन देगा, गांव के बाशिंदे या उस गांव की पंचायत, इसे तय करने का अधिकार संबंधित ग्राम पंचायत को होगा।
इसके पीछे सरकार का मकसद है गांवों की जलापूर्ति परियोजनाओं में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाते हुए उन्हें ये अहसास कराना कि संबंधित पेयजल परियोजनाएं उनकी अपनी व उनके अपनों के लिए है। विभाग के आला अधिकारियों का दावा है ये प्रयास सफल रहेंगे और इस तरह ग्रामीण अपनी इस वॉटर सप्लाई सिस्टम की निगरानी व देखभाल भी करेंगे।
कनेक्शन, वॉटर चार्ज भी खुद रखेंगी पंचायतें
संबंधित गांव में योजना की लागत तय होने के बाद सरकार इस पर 90 फीसद खर्च करेगी। 10 फीसद हिस्सा ग्राम पंचायत को देना है। ये दस फीसद हिस्सा ग्राम पंचायतें अपने फंड से भी दे सकती हैं या फिर ग्रामीणों से 10 फीसद हिस्से की राशि एकत्रित भी कर सकती है। ये निर्णय ग्राम पंचायतों को लेना है।
मगर इसके साथ-साथ बड़ी बात यह कि गांवों में जलापूर्ति सिस्टम शुरू होने के बाद गांव में पेयजल कनेक्शन और वॉटर चार्ज के रूप में जो आय होगी, उसे भी पंचायत अपने पास ही रखेंगी और उसी आय से संबंधित वाटर सप्लाई को भविष्य में मेनटेन करती रहेंगी। इस तरह पंचायतें भी सुदृढ़ बनेंगी।