हरियाणा सरकार ने लाइसेंसशुदा कॉलोनियों के रिहायशी प्लॉट और सीएलयू हासिल कर चुके रेजिडेंशियल प्लॉटों के लिए फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) में बढ़ोतरी कर दी है। इससे प्रदेश के लाखों प्लॉट धारक अतिरिक्त अदायगी कर अधिक दायरे में भवनों का निर्माण कर सकेंगे। उन्हें परचेजेबल डेवलपमेंट राइट्स भी दिए जाएंगे। इसके तहत 75 से 500 वर्ग मीटर या इससे बड़े आकार के प्लॉटों के लिए एफएआर में 0.33 से 0.80 तक की बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है।
हरियाणा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा बिल्डिंग कोड-2016 के तहत नियमित अंतराल पर सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क के भुगतान पर एफएआर में बढ़ोतरी की जाती रही है। इसके तहत अलग-अलग कैटेगरी और शहरों में स्थित रेजिडेंशियल प्लॉट के साथ-साथ सीएलयू हासिल कर चुके प्लॉट धारक अब मौजूदा प्लॉट में और अधिक निर्माण कर सकेंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि निर्धारित प्लॉट साइज से 20 फीसदी अधिक या कम होने पर मूल साइज को ही आधार माना जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि एफएआर में बढ़ोतरी के बावजूद मौजूदा रेजिडेंशियल यूनिट की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकेगी, लेकिन निर्माणाधीन भवनों या निर्मित भवन मालिक के पास अतिरिक्त एफएआर का विकल्प होगा।
इसके लिए विभाग की ओर से निर्धारित साइज के मुताबिक बढ़ाए गए अधिकतम एफएआर हासिल करने की बाध्यता नहीं होगी। अगर किसी भवन को ध्वस्त करने के बाद नए सिरे से निर्माण किया जा रहा है तो उस स्थिति में आंशिक परचेजेबल एफएआर की सुविधा नहीं होगी।
प्रवक्ता ने बताया कि चूंकि अतिरिक्त एफएआर को स्वीकृति मिल चुकी है, इसलिए लाइसेंसशुदा या हुडा कॉलोनियों में जोनिंग प्लान में भी जरूरी बदलाव किए जाएंगे। जिन जगहों पर अतिरिक्त एफएआर की खरीद नहीं की जाती है, वहां कंपोजिशन पॉलिसी ही लागू होगी। खास बात यह होगी कि बढ़ाए गए एफएआर की खरीद से प्राप्त राजस्व संबंधित म्यूनिशिनल अथॉरिटी या हुडा को जाएंगे। जनसंख्या में बढ़ोतरी के कारण इस राशि का इस्तेमाल विकास में किया जा सकेगा।