इस चाबी को संभालकर रखना, भी कैप्टन के खिलाफ चला गया, क्योंकि चाबी दुष्यंत की पार्टी का चुनाव चिह्न है। माना जा रहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे सीएम का इशारा समझा और हलके का पंजाबी समुदाय का मतदाता जजपा की ओर चला गया। दूसरी ओर रामकुमार गौतम के मैदान में आने के साथ ही उसके युवा बेटे रजत गौतम ने भी प्रचार की कमान थाम ली और जजपा का ठप्पा होने के कारण हलके का यूथ उनके साथ जुड़ता चला गया।
रामकुमार गौतम की जीत के कारण
- हलके का इनेलो का वोट बैंक जजपा की ओर डायवर्ट होना।
- दुष्यंत चौटाला, नैना चौटाला व दिग्विजय चौटाला का जोर-शोर से प्रचार करना।
- रामकुमार के बेटे रजत गौतम द्वारा प्रचार अभियान के दौरान यूथ को बड़े पैमाने पर जोड़ना।
कैप्टन अभिमन्यु की हार के तीन कारण
- हलके की जनता से दूरी बनाए रखना।
- अमित शाह की रैली रद्द होना, जिससे कार्यकर्ताओं में हताशा हुई।
- सीएम द्वारा की दोनों जनसभाओं में बार-बार चाबी का जिक्र करना, जिससे जजपा का चुनाव चिह्न हाईलाइट हुआ।
ये था वर्ष 2014 का सीन
वर्ष 2014 के चुनाव में यहां से कैप्टन अभिमन्यु ने 5761 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। उस चुनाव में उनके मुकाबले में इनेलो के राजसिंह मोर थे। कैप्टन को 53770 वोट मिले थे, जबकि राजसिंह को 48009 वोट हासिल हुए थे। हालांकि इस बार कैप्टन को पिछली बार के मुकाबले 7636 वोट ज्यादा मिले, लेकिन फिर भी उन्हें 12029 वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा। रामकुमार गौतम ने 73435 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की।