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हरियाणा दिवस विशेषः गठन के 49 साल, उपलब्धियां और खामियां

Sun, 01 Nov 2015 10:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आज हरियाणा दिवस है। देश के इस राज्य को बने 49 साल हो गए। इस समयावधि में प्रदेश ने कई उपलब्धियां हासिल की तो कई मोर्चों पर विफल भी रहा। धन-धान्य, सांस्कृतिक, साहित्यिक, औद्योगिक विशि ष्टताओं के अलावा खेल व कृषि संपदा से भरपूर इस प्रदेश की विकास यात्रा लंबी नहीं है, लेकिन इसने तेजी से कदम दर कदम सफलता के जो पड़ाव पार किए हैं, वे बेमिसाल हैं।
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यह वही भूमि है जहां आर्यों ने पहला स्तोत्र गाया। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। यह भूमि महाभारत जैसे युग परिवर्तक युद्ध के साथ ही उत्तर मध्यकाल में भारत के इतिहास पर अमिट प्रभाव छोड़ने वाली पानीपत की तीन लड़ाइयों का गवाह रही। हरि अयन (विष्णु निवास) नाम से पहचान रखने वाला यह इलाका कई उतार-चढ़ाव के बाद 1 नवंबर 1966 को हरियाणा नाम से अलग राज्य बना।

चंदगीराम, सुशील कुमार, योगेश्वरदत्त, गीता, बबीता जैसी पहलवान, बॉक्सर बिजेंद्र, मनोजकुमार, सर छोटूराम और चौधरी देवीलाल जैसे जननायक देने वाली इस धरा के वीरों ने देश की रक्षा में अतुल्य योगदान दिया है। इस माटी से जन्मे रागिनी गायक लखमीचंद, मेहरसिंह लोक संस्कृति के वाहक बने, वहीं अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, सरीखी अनेकानेक प्रतिभाओं ने अपने राज्य के साथ ही देश का मान भी बढ़ाया है। आज यह राज्य यौवन पर है। यहां के लाल खेल और खेती में ही नहीं तकनीकी क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं। 
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इस तरह अस्तित्व में आया हरियाण राज्य

वर्तमान हरियाणा राज्य में आने वाला क्षेत्र 1803 में ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया गया था। 1832 में यह तत्कालीन पश्चिमोत्तर प्रांत को हस्तांतरित कर दिया।

सन् 1857 का विद्रोह दबाने के बाद, ब्रिटिश शासन के पुन: स्थापित होने पर अंग्रेजों ने झज्जर और बहादुरगढ़ के नवाब, बल्लभगढ़ के राजा और रेवाड़ी के राव तुलाराम के क्षेत्र या तो ब्रिटिश शासन में मिला लिए या पटियाला, नाभ और जींद के शासकों को सौंप दिए।

इस प्रकार 1858 में यह क्षेत्र पंजाब का हिस्सा बन गया। स्वतंत्रता सेनानी श्रीराम शर्मा की अध्यक्षता में बनी हरियाणा विकास समिति ने एक स्वायत्त राज्य की अवधारणा पर ध्यान केंद्रित किया।

1960 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पंजाब के सिख जब भाषाई आधार पर अलग राज्य की मांग करने लगे तो चौधरी देवीलाल, प्रो. शेर सिंह स्वामी ओमानंद सहित कई अन्य नेताओं ने हिन्दी भाषाई आधार पर हरियाणा राज्य की स्थापना की मांग की।

इसी आंदोलन का नतीजा रहा कि 23 सितंबर 1965 में सरकार ने हुकुमसिंह समति का गठन किया और इस प्रकार एक नवंबर, 1966 को पंजाब प्रांत के पुनर्गठन के बाद हरियाणा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।

इन 5 चरणों में हुआ हरियाणा का गठन

23 सितंबर 1965
संसदीय समिति की सिफारिश पर भारत सरकार ने सरदार हुकुम सिंह कमेटी गठित की।

23 अप्रैल 1966
समिति की सिफारिश पर भारत सरकार ने जस्टिस जेसी शाह की अध्यक्षता में पंजाब-हरियाणा सीमा निर्धारण के लिए आयोग गठन किया।

31 मई 1966
शाह आयोग ने रिपोर्ट सौंपी। इसमें हिसार, रोहतक, गुड़गांव, करनाल और महेंद्रगढ़ जिले के अलावा पंजाब के संगरूर जिले की तहसील जींद, नरवाना और नारायणगढ़, अंबाला, जगाधरी को भी हरियाणा में शामिल किया गया। नरवाना को जींद और नारायणगढ़ व जगाधरी को अंबाला जिले में शामिल किया गया।

18 सितंबर 1966
शाह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर भारत सरकार ने पंजाब पु‌नर्गठन बिल 1966 पास किया, जिसके आधार पर हरियाणा की सीमा का निर्धारण हुआ।

01 नवंबर 1966
हरियाणा राज्य का गठन। इसमें सात जिले थे। हिसार, रोहतक, गुड़गांव, करनाल, महेंद्रगढ़, जींद व अंबाला। पिंजौर क्षेत्र को भी अंबाला में शामिल किया गया। दोनों राज्यों की संयुक्त हाईकोर्ट बनाई।

49 सालों में हरियाणा प्रदेश की उपलब्धियां

शिक्षा
राज्य में 8899 प्राइमरी स्कूल हैं। कॉलेज 210 के करीब हैं और 7 यूनिवर्सिटीज हैं। कुुरुक्षेत्र विवि., एमडीयू, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय और एचएयू शिक्षा में योगदान दे रहे हैं।

स्वास्‍थ्य
रोहतक पीजीआई समेत छह बड़े मेडिकल कॉलेज हैं। 4633 बेड की क्षमता वाले 56 नागरिक अस्पताल हैं। कुल पीएचसी 485 और 119 सीएचसी हैं। वहीं 2630 सब सेंटर हैं।

परिवहन
प्रदेश में कुल 1500 किमी की लंबाई केसाथ करीब 30 नेशनल हाईवे हैं। 2500 किमी की लंबाई के साथ कई स्टेट हाईवे हैं। रोडवेज के बेडे़ में 3844 बसें हैं जो प्रतिदिन 12.40 लाख यात्रियों को ले जाती हैं।

खेती
प्रदेश में 3.7 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र है। यह कुल क्षेत्र का 84 फीसदी के लगभग है। कुल सिंचित क्षेत्र करीब 3 मिलियन हेक्टयर में से 43.4 फीसदी नहरों और 56.7 फीसदी ट्यूबवेल से सिंचित है।

बिजली
प्रदेश में 13818.02 मेगावाट बिजली का उत्पादन थर्मल और हाइडल प्रोजेक्ट से हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश में पचास लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ता हैं।
5500 करोड़ का बिजली बिल बकाया है।
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49 सालों में इस समस्याओं का हल नहीं ‌खोज पाया

आर्थिक रूप से समृद्ध होने के बाद भी हरियाणा में शिक्षा का वह स्तर नहीं है, जो होना चाहिए था। 2.54 करोड़ की जनसंख्या वाले राज्य में साक्षरता दर 75.55 फीसदी है। प्राइमरी स्कूलों में 12 हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। 2.54 करोड़ लोगों के लिए चिकित्साकर्मी अपर्याप्त हैं। डेंगू के मामलों में ही विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी के साथ सुधार की बेहद जरूरत है। कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत। सड़कों की हालात सुधारने की जरूरत है। कुछ इलाकों में जैसे दक्षिणी हरियाणा के नारनौल-महेंद्रगढ, रेवाड़ी में सड़कों की स्थिति ठीक नहीं हैं। वहीं गांवों तक परिवहन सुविधाएं बढ़ाने पर जोर देना होगा।नहरी पानी से सिंचित क्षेत्र का दायरा बढ़ाने के लिए एसवाईएल नहर का मुद्दा सुलझना होगा है। किसानों कोप्रोत्साहित करने की योजनाओं का शुभारंभ जरूरी है,ताकि उनका रुझान खेती के साथ पशुपालन, बागवानी की ओर बढ़े।बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन प्लांट पर काम चल रहा है। 1 गुणा 1800 मेगावाट क्षमता वाला हाई एफिशिएंसी सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांट पानीपत और 1 गुणा 1800 मेगावाट एडिशनल हाई एफिशिएंसी थर्मल प्लांट यमुनानगर में तैयार होगा।
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