बलवंत सिंह रामूवालिया आज यूपी में कैबिनेट मंत्री बन गए। इसका बदला उनकी बेटी को पद से हटाने की चर्चा रही है। रामूवालिया के मंत्री बनने की खबर फैलते ही उनकी बेटी अमनजोत कौर को मोहाली जिला योजना बोर्ड के चेयरपर्सन पद से हटाने की बातें शुरू हो गईं।
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इस संबंध में शिअद ने अभी औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्र इसकी पुष्टि कर रहे हैं। वैसे भी रामूवालिया के जाने के बाद अब पार्टी किसी और चेहरे को मोहाली में उतारने पर विचार करने पर मजबूर है। ऐसे में जल्द ही योजना बोर्ड पर नई नियुक्ति किए जाने की प्रबल संभावना है।
शिअद ने अवसरवादी बता रामूवालिया को किया बर्खास्त
बलवंत रामूवालिया ने कहा है कि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और पार्टी को इस्तीफा भेजा गया है, लेकिन शिअद ने देर शाम एक बयान जारी कर कहा है कि रामूवालिया ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। इसलिए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
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‘मुलायम ने न्योता देकर सरप्राइज दिया’
शपथ लेने के बाद रामूवालिया ने कहा है कि उन्हें समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने फोन कर मंत्रिमंडल में शामिल होने का न्योता देकर सरप्राइज दिया था। वह उनका सम्मान करते हैं और उनके न्योते को नकार नहीं सकते।
रामूवालिया ने कहा कि इससे पहले जब देवगौड़ा सरकार में वह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री बने, तब भी मुलायम सिंह यादव ने ही उन्हें सांसद न होते हुए भी केंद्र में अहम स्थान दिलवाया था। रामूवालिया जल्द ही मोहाली आएंगे।
रामूवालिया ने शिअद से पहले भी तोड़ा था नाता रामूवालिया ने 1996 में शिअद से नाता तोड़ा था और केंद्र में मंत्री बने थे। इसके बाद उन्होंने लोक भलाई पार्टी बनाई और पिछले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले नवंबर 2011 में अपनी पार्टी का शिअद में विलय कर दिया।
शिअद ने उन्हें मोहाली विधानसभा से चुनाव में उतारा था, लेकिन वह बड़े अंतर से हार गए। इसके बाद उन्हें मोहाली का हलका इंचार्ज बनाया गया था। उनकी सक्रियता कम रह गई थी और मोर्चा उनकी बेटी अमनजोत कौर रामूवालिया ने संभाल रखा था।
यूपी में मंत्री बनकर शिअद को दिया झटका
यूपी में कैबिनेट मंत्री बनकर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलवंत सिंह रामूवालिया ने संकट की घड़ी में चल रहे शिअद को जोर का झटका दिया है। पंजाब में पंथक मुद्दे पर घिरने के बाद शिअद से नेताओं के इस्तीफे आते रहे हैं, लेकिन रामूवालिया का इस्तीफा पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है।
शिअद ने रामूवालिया को सबसे बड़ा अवसरवादी करार दिया है। हालांकि, शिअद के कद्दावर नेताओं सुखदेव सिंह ढींडसा, बलविंदर सिंह भुंदड़, महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल, सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा और दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि इस बार रामूवालिया ने शिअद में लंबी पारी नहीं खेली। लिहाजा, उनके जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि इस्तीफे से साबित हो गया है कि रामूवालिया सत्ता के लालची हैं और वैसे भी मोहाली की जनता उन्हें नकार चुकी थी। इन नेताओं ने रामूवालिया पर एनआरआई से खिलवाड़ करने का भी लगाया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वर्ष 1996 में केंद्र में मुलायम सिंह यादव के सहारे मंत्री पद हासिल करने के एवज में अब रामूवालिया यूपी विधानसभा चुनाव में सपा के लिए अहम भूमिका निभाएंगे। सपा रामूवालिया को यूपी के सिख वोटरों को अपने हक में करने के लिए प्रचार में उतारेगी।
यूपी के तराई वाले इलाके में सिख वोटर चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। यह आश्चर्यजनक होगा, क्योंकि शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दो महीने पहले एलान किया था कि शिअद यूपी की 35 सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। शिअद ने यूपी के लिए अपने सात इंचार्ज भी लगाए हैं।
डूबता जहाज है शिअद -बाजवा रामूवालिया केइस्तीफे के बाद पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने शिअद को डूबता जहाज बताया है। उन्होंने यहां एक पत्रकार वार्ता में कहा कि वह दिन दूर नहीं जब शिअद में बादल, सुखबीर, हरसिमरत व मजीठिया ही रह जाएंगे। बाजवा ने मौजूदा हालात के लिए बादलों को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा कि प्रदेश में हालात बेकाबू हैं और सुखबीर बादल दावा कर रहे हैं कि सब कुछ ठीक चल रहा है।
बाजवा ने संत समाज की ओर से पंजगराईं खुर्द के दो भाइयों रुपिंदर व जसविंदर को रिहा करने की मांग का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें गलत फंसाया है। बाजवा ने जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ से भी इस्तीफा मांगा और साथ ही एसजीपीसी से अपील की कि वह सीएम बादल को दिया फखर-ए-कौम पंथ रत्न का दर्जा वापस ले।