सदन से अनुपस्थित रहे कांग्रेस विधायक दल
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हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन से अनुपस्थित रहे कांग्रेस विधायक दल ने मंगलवार को एक बैठक बुलाकर प्रदेश सरकार के कार्यकलाप की निंदा की है। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि कांग्रेस प्रदेश में आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में संपत्ति व जानमाल का नुकसान और उपद्रव रोकने में विफल रही भाजपा सरकार की ओर से विधानसभा के भीतर और बाहर कांग्रेस व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जिस तरह दोषारोपण किया जा है, उसकी निंदा करती है।
प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि एक अलोकतांत्रिक साजिश के तहत कांग्रेस विधायकों को सदन से बाहर रखकर उनकी अनुपस्थिति में उन पर दोषारोपण निंदनीय है। यह भी कहा गया कि जो व्यक्ति सदन में आरोपों का जवाब देने के लिए उपस्थित न हो, उस पर आरोप लगाना स्वस्थ लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन है। प्रस्ताव में कहा गया कि हिंसा के पहले और हिंसा के समय जिस प्रकार की भूमिका सरकार की रही है, यह साफ तौर पर सरकार की विफलता को दर्शाती है। अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में जनता के बीच अत्यन्त अलोकप्रिय हो चुकी भाजपा सरकार ने भाई को भाई से लड़ाने की नीति का सहारा लेकर हरियाणा को हिंसा की आग में झोंक दिया।
प्रस्ताव में कहा गया कि इस बात के कई सबूत हैं कि भाजपा सरकार के मंत्री, सांसद व विधायक और सदन में उनकी सहयोगी इनेलो की ओर से इस हिंसा को भड़काया गया और फिर सरकार ने मूकदर्शक बनकर हिंसा रोकने का न कोई प्रयास किया न कोई प्रतिबद्धता दिखाई। प्रस्ताव में यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री धनखड़ व सांसद राजकुमार सैनी ही इस हिंसा के सूत्रधार हैं और अब इसका राजनीतिक लाभ उठाने के लिए जातिवाद का राग अलाप कर हरियाणा के भाईचारे पर आघात कर रहे हैं।