विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दल कांग्रेस और इनेलो ने एसवाईएल का हल अब तक नहीं निकल पाने पर हरियाणा सरकार को घेरा है। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि हरियाणा को उसके हक का पानी मिले, इसके लिए नहर का निर्माण होना चाहिए। यह नहर दशकों से लंबित है, बहुत बार ट्रिब्यूनल बने, बहुत बार आदेश आए और स्पष्ट तौर पर हरियाणा का हक सभी संस्थाओं ने स्थापित किया है। उच्चतम न्यायालय के द्वारा किसी निश्चित एजेंसी द्वारा इसे सुपरवाइज करवाया जाए तभी यह नहर बन सकती है।
गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत करते हैं। हरियाणा की जनता एसवाईएल का पानी लेने के लिए सालों से इंतजार कर रही हैं। हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि पंजाब सरकार को हरियाणा के कानूनी हक का सम्मान करते हुए हरियाणा को तत्काल पानी देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
जननायक जनता पार्टी के प्रधान महासचिव दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि एसवाईएल का पानी हरियाणा का हक है और उसे लेकर रहेंगे। उन्होंने केंद्र से मांग करते हुए कहा कि पैरामिलिट्री फोर्स लगाकर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के तहत एसवाईएल नहर का निर्माण करवाया जाए ताकि हरियाणा के किसानों को अपने हिस्से का पानी मिले।
एसवाईएल के निर्माण पर ढुलमुल रवैया छोड़े सीएम: कांग्रेस
पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। प्रदेश सरकार केंद्र के समक्ष अच्छी तरह से पैरवी करते हुए जल्द से जल्द इसका सर्वे शुरू करवाए। यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज तक न तो एसवाईएल नहर के लिए प्रधानमंत्री से कोई बात की और न ही एक हफ्ते पहले अमृतसर में हुई उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में एसवाईएल नहर मुद्दे को सही ढंग से उठाया। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा सरकार एसवाईएल पर ढुलमुल रवैया छोड़े। हरियाणा सरकार को देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश की अवहेलना का केस दाखिल करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार अपने आपको कमजोर न समझे, इस मामले में हम उनके साथ खड़े हैं।
सीएम ने एसवाईएल के निर्माण को गंभीरता से नहीं लिया: इनेलो
इनेलो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने कहा कि ओम प्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री रहते हुए एसवाईएल की कानूनी लड़ाई लड़ी थी, जिसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर बनाने का निर्णय हरियाणा के पक्ष में सुनाया था लेकिन आज तक न तो पंजाब ने और न ही केंद्र ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और मामले को बिना वजह लटकाने का काम किया है। प्रदेश का दुर्भाग्य है कि मौजूदा मुख्यमंत्री ने आज तक एसवाईएल के निर्माण को गंभीरता से नहीं लिया है।