हुड्डा सरकार 67 से 40 पर आई थी हमारी केवल 7 सीटें कम हुई हैं। खुले मन से हार के पीछे के कारणों को लेकर चर्चा की गई है। हालांकि उन्होंने भितरघात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि हार के पीछे आपसी फूट का कारण कहीं नहीं है। जो भी कारण थे सामूहिक थे। हरियाणा की जनता ने जो फैसला लिया सोच समझकर लिया है।
कैबिनेट ने कहा कार्यकर्ताओं की नब्ज पर नजर रखना जरूरी
कैबिनेट के सदस्यों ने कहा कि जहां पर भाजपा चुनाव हारी है और जजपा जीती है। वहां पर कार्यकर्ताओं में यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि उनके काम नहीं हो रहे। ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के कार्यों पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। कार्यकर्ताओं को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वे उपेक्षित हैं।
जातीय समीकरण भी रहे हावी
बैठक में कुछ नेताओं ने यहा भी कहा कि हमारे किए गए कार्यों से जनता संतुष्ट है। 75 पार का नारा जनता के ऊपर अधिक प्रभाव नहीं छोड़ पाया। चुनाव में कई स्थानों पर जातीय समीकरण भी हावी रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों से बात करने के बाद उन्हें आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस तरह की बैठके होती रहेंगी। भले ही कुछ लोग हार गए हैं, लेकिन वे पार्टी के बडे़ नेता हैँ और उनको पूरा सम्मान दिया जाएगा।