हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की जेई सिविल की परीक्षा में ब्राह्मणों से जुड़े विवादित सवाल को विपक्ष के मुद्दा बनाने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल एक्शन में आ गए हैं। विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद सीएम ने आयोग के चेयरमैन को तलब कर न केवल पूरी रिपोर्ट ली है, बल्कि जेई परीक्षा से विवादित सवाल को भी हटवा दिया गया है। अब परीक्षा के कुल अंकों में इस सवाल के अंक नहीं जुड़ेंगे। इसके अलावा चीफ एग्जामिनर को अयोग्य करार देने के साथ आयोग का पेपर सेट करने के लिए आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि आयोग के चेयरमैन बीबी भारती ने पूरे मामले में सतर्कता बरती है। पेपर सेट होने के बाद परीक्षा केंद्र के अंदर ही खुलता है, इसके बारे में किसी को भी जानकारी नहीं होती। जैसे ही सवाल पर विवादित हुआ, चेयरमैन ने तुरंत कार्रवाई की। विवादित सवाल अब जेई परीक्षा का हिस्सा नहीं होगा। परीक्षार्थियों ने सवाल का जो भी जवाब दिया हो, उसका कोई अंक नहीं जुड़ेगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह विवाद के दौरान विदेश दौरे पर थे। उन्होंने उस दौरान भी चेयरमैन से बात कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
उन्होंने बताया गया कि एक प्रश्नपत्र को तीन से चार चीफ एग्जामिनर सेट करते हैं। इन प्रश्नपत्रों का कोई एक सेट परीक्षा हाल में पहुंचता है और वहीं पर खुलता है, ताकि परीक्षा की गोपनीयता भंग न हो। सीएम ने कहा कि ब्राह्मण समुदाय के लोग सम्मानित हैं। गलती के लिए आयोग भी खेद प्रकट कर चुका है। चीफ एग्जामिनर के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की मांग पर ब्राह्मण समुदाय के लोगों के साथ बैठक में जो सहमति बनेगी, उस अनुसार कार्रवाई करेंगे। सूत्रों के अनुसार सरकार मुद्दे को खत्म करने के लिए एफआईआर दर्ज करा सकती है।
ये पूछा गया था सवाल
जेई परीक्षा में आयोग ने पूछा था कि हरियाणा में निम्न में कौन अपशकुन नहीं माना जाता। उत्तर के विकल्पों में पानी से भरा मटका, काला ब्राह्मण, ब्राह्मण कन्या को देखना और फ्यूल भरा कास्केट दिया गया था।