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हरियाणा: गंभीर जल संकट से खुद निपटेंगे, केंद्र से मंजूरी का झंझट खत्म, पढ़ें- कैबिनेट के अन्य फैसले

Sat, 17 Oct 2020 01:22 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा कैबिनेट की बैठक। - फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा सरकार अपने यहां के जल संकट से उबरने के लिए अब खुद निर्णय लेगी। केंद्रीय जल बोर्ड के निर्णय उस पर लागू नहीं होंगे। न ही मंजूरी का झंझट रहेगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, प्रबंधन और विनियमन) प्राधिकरण विधेयक, 2020 के प्रारूप को स्वीकृति दी गई। अब तक भू जल का विनियमन केंद्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा था।

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राज्य में प्रभावी कानून के अभाव में पानी के अधिक उपयोग के कारण कई क्षेत्रों में सतही जल की कमी के साथ भूजल स्तर में गिरावट की खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है। भविष्य में गंभीर जल संकट और पानी के अत्यधिक दोहन की स्थिति से निपटने के लिए राज्य में पानी की सुरक्षा, संरक्षण, नियंत्रण एवं उपयोग को नियमित करने के लिए एक उचित कानून बनाने की अत्यधिक आवश्यकता है।

प्राधिकरण में चयन समिति द्वारा नियुक्त अध्यक्ष सहित पांच सदस्य शामिल होंगे। प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और प्राधिकरण के पास मसौदा विधेयक की धारा 8 के तहत नियुक्त किया जाने वाला अपना स्वयं का स्टाफ होगा। इसके अतिरिक्त, विधेयक की धारा 12 के तहत प्राधिकरण को शक्तियां एवं कार्य प्रदान किए गए हैं।

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प्राधिकरण के पास सिविल कोर्ट की शक्तियां भी होंगी और प्राधिकरण के आदेशों या निर्देशों का पालन न करना धारा 22 के तहत दंडनीय होगा। विधेयक की धारा 25 के तहत अनधिकृत कृत्यों के लिए दंड के साथ-साथ धारा 26 के तहत जुर्माने का भी प्रावधान है। प्राधिकरण द्वारा हर तीन वर्ष बाद प्रत्येक जिले के लिए तैयार जल योजनाओं के आधार पर एक एकीकृत राज्य जल योजना तैयार की जाएगी। प्राधिकरण धारा 16 के तहत अनुमति देने या इस अधिनियम के किसी भी अन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगा और उसे सरकार से अनुमोदित करवाएगा

मेगा फूड पार्क को नाबार्ड से ऋण की मंजूरी
हरियाणा मंत्रिमंडल ने रोहतक में मेगा फूड पार्क परियोजना की स्थापना के लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन प्रसंघ लिमिटेड (हैफेड) को 55 करोड़ रुपये का सावधि ऋण लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

यह परियोजना औद्योगिक मॉडल टाउनशिप रोहतक में स्थापित की जा रही है। परियोजना 50 एकड़ में फैली हुई है। इसमें एमएसएमई के लिए 24 स्टैंडर्ड डिजाइन फैक्ट्री (एसडीएफ) शेड के अलावा 450 से 4050 वर्ग मीटर तक के 80 प्लॉट हैं। इस मेगा फूड पार्क में निवेशकों द्वारा मल्टी क्रॉप प्रोसेसिंग लाइन (सब्जियां और फल), रेडी-टू-ईट फूड, स्पाइस प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग, ऑयल एक्स्ट्रेक्शन, कैनिंग, बेकरी, इंटीग्रेटेड मिल्क प्रोसेसिंग, टेट्रा पैकेजिंग यूनिट, एनिमल फीड फॉर्म्यूलेशन यूनिट्स आदि से संबंधित इकाइयां लगाई जा सकती हैं। इस परियोजना के भाग के रूप में, जिला यमुनानगर के मानकपुर, जींद के नरवाना और रेवाड़ी के बावल में तीन प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र (पीपीसी) भी स्थापित किए जाने हैं।

टोल लगाने को दी मंजूरी

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल बैठक में कालाअंब-सढौरा-शाहबाद रोड पर 31 मार्च 2022 तक के लिए टोल प्वाइंट संख्या 26 की पुन:स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह निर्णय इसलिए लिया गया है, क्योंकि 19.80 करोड़ रुपये की लागत से इस रोड के सुधार का कार्य पूरा हो गया है।
                               
भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी
मंत्रिमंडल बैठक में गांव जठेड़ी (पूंडरी), जिला कैथल की राजस्व संपदा में स्थित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की 426 कनाल 19 मरला भूमि को महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। यह भूमि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सरकार की नीति के अनुसार कलेक्टर रेट पर दी जाएगी। 

बैठक में हिसार में न्यू मॉडल स्टोर के निर्माण के लिए राजकीय पशुधन फार्म, हिसार की 4 एकड़ 3 कनाल भूमि एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के कलेक्टर रेट पर दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को हस्तांतरित करने के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। 

अंबाला के गांव चंदपुरा में पहुंच मार्ग के विस्तार के लिए नगर परिषद, अंबाला सदर की लगभग 1 कनाल 2 मरला भूमि को विकास शुल्क के साथ 44 लाख रुपये प्रति एकड़ के मौजूदा कलेक्टर रेट पर लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। पंचायत समिति भट्टू कलां की 13 कनाल 2 मरला भूमि के जिला फतेहाबाद में स्थित मैसर्स एनसीएमएल प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम की 13 कनाल 2 मरला भूमि के साथ तबादले की स्वीकृति प्रदान की गई।
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महिला कर्मचारियों को तबादलों में बड़ी राहत    

मंत्रिमंडल बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग की अध्यापक स्थानांतरण नीति-2016, 2017 में संशोधित को मंजूरी प्रदान की गई। तबादलों में  ‘नवविवाहित’ या ‘हाल ही में तलाकशुदा’ महिला कर्मचारियों को अनुरोध पर खाली पद पर पसंदीदा नियुक्ति दी जाएगी। उन्हें अगले स्थानांतरण अभियान में भाग लेना होगा और उन्हें उस समय उपलब्ध रिक्त पदों के विरुद्ध उनके तीन विकल्पों में से किसी एक में समायोजित किया जाएगा।

आम तौर पर एक कर्मचारी का 35 वर्ष का सेवाकाल होता है, इसलिए एक अध्यापक को अपने सेवा करियर के दौरान अधिकतम 5 वर्षों के लिए एक जोन में सेवा करनी होती है। जोन-1, जोन-2, जोन-3 और जोन-4 के मामले में यदि किसी अध्यापक ने पांच साल का स्टे पूरा कर लिया है तो ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव या ऑफलाइन, अस्थायी आवंटन में ऐसा जोन उसे स्टेशन चुनने के लिए उपलब्ध नहीं होगा। यदि जोन-5, जोन-6 या जोन-7 में स्थित किसी स्कूल में कार्यरत कोई अध्यापक इनमें से किसी जोन में स्टे का विकल्प देता है तो उसे इनमें से किसी एक जोन का स्कूल आवंटित किया जाएगा और उसे ऐसे स्कूल में अगले पांच वर्षों तक रहने की अनुमति दी जाएगी।

जब तक कि वह नीति के अन्य प्रावधानों अर्थात पदों के रेशनलाइजेशन, पदों के अवरुद्ध होने या अपनी पसंद पर आनलाइन स्थानांतरण अभियान में अनिवार्य रूप से भाग नहीं लेता। मेवात काडर (आरओएच काडर) को छोड़कर शेष हरियाणा के अध्यापक मेवात जिले में भी अपनी पोस्टिंग चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे।
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