हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के विजन में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के मॉडल की झलक साफ दिखाई दी। केजरी के शिक्षा, बिजली, पानी व स्वास्थ्य के एजेंडे को गठबंधन सरकार ने भी हाथोंहाथ लिया है। मूलभूत सुविधाओं पर फोकस करते हुए सरकार ने बजट आवंटन में भी दरियादिली दिखाई है। जिससे प्रतीत होता है कि भाजपा सरकार ने 2024 के चुनावी रण की तैयारी 2020 में ही शुरू कर दी है। इन जनहित के मुद्दों पर अधिक से अधिक काम कर सरकार विपक्ष को चित करना चाहती है, जैसा केजरीवाल ने दिल्ली में किया।
उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों को साइड में रखते हुए स्थानीय मुद्दों व कामों को गिनाने पर ही ध्यान केंद्रित रखा, जिससे एकतरफा जीत मिली। अब मनोहर लाल भी हरियाणा में वैसा ही करिश्मा करके दिखाना चाहते हैं। चूंकि, हरियाणा में उनकी डगर आसान नहीं है। जजपा के साथ गठबंधन कर उन्होंने सरकार बनाई है। जिसकी मुश्किलें शुरू से ही कम नहीं हो रही। पूर्व मनोहर सरकार के मंत्रियों पर जहां भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, वहीं सहयोगी आजाद विधायक बलराज कुंडू अपना समर्थन वापस ले चुके हैं।
जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने भ्रष्टाचार सहित अन्य मुद्दों को लेकर सरकार व अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। जिससे सरकार के लिए स्थिति असहज बन रही है। गौतम सड़क से सदन तक सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ रहे। टोहाना से जजपा विधायक भी कड़े तेवरों में हैं। वे भी विज से भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत कर चुके हैं।
जजपा विधायकों जोगी राम सिहाग, नैना चौटाला व ईश्वर सिंह ने भी विकास को लेकर अपना स्टैंड स्पष्ट रखा है। जिस पर सरकार सदन में घिर रही है। इसे देखते हुए भाजपा 2024 में अपने बूते सत्ता में आने का सपना देख रही है। 2014 के चुनाव में भाजपा ने प्रदेश में 47 सीटें जीती थी, जो 2019 में कम होकर 40 रह गईं। नारा 75 पार का था, जिसकी हवा निकली। अब सीएम मनोहर लाल ने वर्तमान बजट के लिए गठबंधन सरकार के पहले ही साल में सीधे जनता से जुड़ने की कोशिश की है ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्ष को मात दी जा सके।