सरकार और जाट नेताओं के बीच तीन चरणों में चली दूसरे दौर की वार्ता कई बातों के कारण सिरे नहीं चढ़ी। अब बीजेपी सरकार क्या कदम उठाएगी कयास लगाए जा रहे थे कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार के बीच सुलह हो जाएगी, लेकिन पांच मागों पर अभी भी पेच फंसा है। पानीपत रिफाइनरी टाउनशिप में करीब साढ़े तीन घंटे तक बातचीत चली।
इन मांगों पर अटका पेच
1. हरियाणा सरकार द्वारा 6 जातियों को दिए गए आरक्षण को संविधान की नौवीं सूची में डाला जाए।
2. जेलों में बंद युवाओं को तुरंत रिहा किया जाए।
3. आंदोलन के दौरान शहीदों के आश्रितों को पक्की सरकारी नौकरी दी जाए।
4.जातीय वैमनस्य फैलाने वाले सासंद राजकुमार सैनी की ऐथिक्स कमेटी से जांच कराकर उसकी संसद सदस्यता रद्द की जाए।
5.आंदोलन के दौरान जातीय द्वेष फैलाने वाले दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों की जांच कराकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
नई रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी खट्टर सरकार
जाट आरक्षण आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे दौर की बातचीत के बाद जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर हरियाणा की खट्टर सरकार आने वाले दिनों में सधी हुई रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी। चूंकि, जाटों के वार्ता की मेज पर आने से सरकार और आंदोलनकारियों के बीच तल्ख हुए हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। ऐसे में सरकार न मानी जा सकने वाली मांगों को लेकर आंदोलनकारियों के समक्ष अपना रुख साफ कर सकती है, जबकि कुछ मुद्दों के समाधान के लिए समय लिया जा सकता है।
सरकार और आंदोलनकारियों की दूसरे दौर की वार्ता को बेनतीजा नहीं कहा जा सकता, इसमें दो मांगों पर सरकार ने हामी भर दी है। बाकि पांच मांगों पर प्रमुख रूप से पेंच फंसा हुआ हैं। सूत्रों के मुताबिक अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के साथ ही जाट नेता भाजपा सांसद राजकुमार सैनी की संसद सदस्यता रद करने व उनके और अन्य साथियों पर आपराधिक धाराओं में जातीय वैमन्य फैलाने के लिए केस दर्ज कराने पर अड़े हुए हैं।
इसके साथ ही बीते वर्ष आंदोलन के दौरान जातीय द्वेष फैलाने वाले दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है। मलिक गुट इन मांगों पर कतई समझौता करने को तैयार नहीं है। पक्की नौकरी को लेकर भी सरकार के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। जाट नेता डीसी रेट पर नौकरी से एक बार फिर पांच सदस्यीय वार्ता समिति को दो टूक मना कर चुके हैं।
सोमवार को पानीपत में हुई वार्ता में भी इन्हीं मुद्दों पर पेच फंसने के कारण सुलह नहीं हो सकी। हालांकि ये माना जा रहा है कि दोनों पक्षों में जल्दी समझौते की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
सरकार ने फिर से बनाई उच्च स्तरीय कमेटी
जाट आरक्षण आंदोलन
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सूत्रों के अनुसार धरनों में शामिल अधिकांश जाट नेताओं को भी साध लिया गया है। उनकी मांगों पर सरकार की मंजूरी के बाद ही समिति कोई सार्वजनिक रूप से घोषणा करेगी। उधर, हरियाणा सरकार ने आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की समीक्षा के लिए तीन अधिकारियों की उच्च स्तरीय कमेटी बना दी है। ये जेल में बंद आंदोनकारियों की रिहाई तथा विभिन्न लोगों पर दर्ज मुकदमों की वापसी का रास्ता तैयार करेगी।
कमेटी के सदस्यों की संख्या चार भी की जा सकती है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने समिति की तरफ से हाईकोर्ट के किसी वरिष्ठ अधिवक्ता अथवा रिटायर्ड न्यायाधीश का नाम देने की पेशकश की है। यह नाम अगले एक दो दिन में सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा। प्रदेश सरकार की तरफ से इस कमेटी में दो वरिष्ठ अधिकारी होंगे, जिनके नाम अभी तय किए जाने हैं।
इनमें एडवोकेट जनरल और पुलिस विभाग का कोई उच्च अधिकारी शामिल हो सकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल से चर्चा के बाद इन दोनों अधिकारियों के नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्य सचिव डीएस ढेसी के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय कमेटी की मंगलवार को चंडीगढ़ में बैठक संभव है। कमेटी के मंत्री समूह की अनौपचारिक बैठक के दौरान आंदोलनकारियों के साथ हुई वार्ता की पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मंत्री समूह को देने की उम्मीद है।
इस तरह से तीन चरणों में हुई बातचीत
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पहला चरण: बनाई 11 सदस्यीय कमेटी
पहले दौर की बैठक में यशपाल मलिक ने कहा कि सरकार बात नहीं सुनती तो मीटिंग और वार्ताओं का कोई फायदा नहीं है। सरकार हर बार सहयोग की बात कहती है, लेकिन उनको प्रदेश में ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा। रोहतक पीजीआई में अधिकारी घायलों के सर्टिफिकेट बनाने में आनाकानी कर रहे हैं। समित के महासचिव अशोक बल्हारा ने कहा कि जाट अब अनदेखी सहन नहीं करेंगे। अन्य जाट नेताओं ने भी उनके सुर में सुर मिला दिया। हंगामा होता देख अधिकारियों ने कहा कि इस तरह से बैठक सफल नहीं हो पाएगी। इसके बाद समिति ने 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया और बाकी लोग बाहर आ गए।
दूसरा चरण: कमेटी सदस्यों ने खुलकर रखी बात
दूसरे चरण में 11 सदस्यीय कमेटी ने सरकार के सामने अपनी सभी सात मांगों को रख दिया। इनको पूरा करने पर ही धरना समाप्त करने की बात कही। ढेसी कमेटी ने मांगों को लेकर कुछ रास्ता निकलने का आश्वासन दिया। इस पर जाट नेताओं ने कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। अधिकारियों ने उनके साथ सरकार से बात करने के लिए 15 मिनट का समय मांगा।
तीसरा चरण: दो मांगों पर बनी सहमति
तीसरे चरण में 11 सदस्यीय कमेटी के अलावा छह अन्य सदस्यों को शामिल किया गया। मुख्य सचिव ढेसी ने कहा कि सरकार ने गंभीर घायलों को पूर्व में घोषित दो लाख रुपये मुआवजा देने और प्रदेश भर में दर्ज मुकदमों को लेकर चार सदस्यीय कमेटी बनाने का फैसला लिया है। कमेटी में सरकार और समिति के दो-दो सदस्य शामिल होंगे और चार दिन में फाइनल रिपोर्ट बनाई जाएगी। समिति में अशोक बल्हारा और एक अन्य को शामिल किया गया है। ढेसी की मांग पर जाट नेताओं अन्य पांच मांगों पर फैसला लेने के लिए सात दिन का समय दिया।