हरियाणा में भाजपा के सात नवनिर्वाचित सांसदों में से छह सांसद चाहते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व में न लड़ा जाए और गठबंधन की शर्तों में फेरबदल हो।
सांसदों ने ये सुझाव भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में दिए। एक सांसद अश्वनी चोपड़ा ने राय दी कि भाजपा को गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव लड़ना चाहिए जबकि फरीदाबाद के सांसद कृष्णपाल गुर्जर की राय है कि गठबंधन बरकरार रहना चाहिए और गठबंधन तोड़ने की पहल नहीं करनी चाहिए।
कोर ग्रुप की शुक्रवार को रोहतक में बैठक हुई। बैठक में मौजूद कई नेताओं के सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि सांसदों में राव इंद्रजीत सिंह, धर्मबीर सिंह, रमेश कौशिक, राज कुमार सैनी, रतन लाल कटारिया के साथ रोहतक के उम्मीदवार ओमप्रकाश धनखड़, भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज, भाजपा के प्रवक्ता कैप्टन अभिमन्यु ने एकमत से राय दी कि हजकां के साथ भाजपा का जिन शर्तों पर गठबंधन हुआ था, उनमें अब बदलाव होना चाहिए।
भाजपा की भूमिका अब बदल गई है
शर्त के मुताबिक, पहले ढाई साल हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई मख्यमंत्री रहेंगे और बाद के ढाई साल भाजपा का मुख्यमंत्री रहेगा। इन नेताओं की राय थी कि भाजपा की भूमिका अब बदल गई है और 52 विधानसभा सीटों पर विजेता रही है इसलिए पहले वाली शर्तों में भी बदलाव होना चाहिए। सांसद कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि गठबंधन के बारे में भाजपा के नेताओं के अलग-अलग बयान आ रहे हैं। इससे अच्छा संदेश नहीं जा रहा है।
गठबंधन जारी रहना चाहिए और भाजपा को इसे तोड़ने की पहल नहीं करनी चाहिए। सुभाष भराला ने भी गुर्जर के सुर में सुर मिलाया। सूत्रों ने बताया कि जहां हजकां के साथ गठबंधन की शर्तों में फेरबदल करने की मांग उठी, वहीं इनेलो के साथ गठबंधन न करने पर भी सबने सहमति व्यक्त की।
हरियाणा प्रभारी जगदीश मुखी, सहप्रभारी अनिल जैन और हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष राम बिलास शर्मा ने कहा कि शर्तों में फेरबदल का फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही कर सकता है। इसलिए बैठक में रखी गई राय केंद्रीय नेतृत्व के आगे रख दी जाएगी।
गुर्जर, धर्मबीर, कौशिक, चोपड़ा, धनखड़ ने की शिकायत
कोर ग्रुप की बैठक में नवनिर्वाचित सांसदों से उनके चुनाव के बारे में जानकारी ली गई। धर्मबीर सिंह ने कहा कि भिवानी-महेंद्रगढ़ में उन्हे हजकां से कोई साथ नहीं मिला।
रमेश कौशिक ने कहा कि उन्हें तो मुख्यमंत्री का परिवार हराने में जुटा था मगर हजकां का भी साथ नहीं मिला। अश्वनी चोपड़ा ने कहा कि करनाल में हजकां कार्यकर्ताओं ने उनका साथ नहीं दिया।
ओपी धनखड़ ने कहा कि उन्हें रोहतक में कैप्टन अभिमन्यु का साथ नहीं मिला। कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि उन्हें सबका साथ मिला मगर जो उनके खिलाफ टिकट मांग रहे थे उनका साथ नहीं मिला।
हजकां तोड़ सकती है गठबंधन
उधर, भाजपा ने कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व में चुनाव न लड़ने की शर्त रखी और
सीटों की 45-45 संख्या में बदलाव करने की कोशिश की तो हजकां अध्यक्ष
कुलदीप बिश्नोई भाजपा से गठबंधन भी तोड़ सकते हैं। बिश्नोई ने इसी सप्ताह
साफ भी किया था कि अगर स्वाभिमान पर आंच आई तो सब 90 सीटों पर हजकां चुनाव
लड़ सकती है।
सीटों का हो जल्द बंटवारा
कोर ग्रुप में सांसदों और ग्रुप के सदस्यों ने मांग रखी कि भाजपा-हजकां के बीच सीटों का बंटवारा जल्द हो जाना चहिए ताकि उन सीटों पर उम्मीदवार भी जल्द तय हो सकें। इस समय चुनाव आचार संहिता लगने में 100 दिन हैं। कुलदीप बिश्नोई के साथ बातचीत को-आर्डिनेशन कमेटी करेगी।