हरियाणा विधानसभा में शीतकालीन सत्र के पहले दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष गाय और बछड़े के बीच उलझे नजर आए। कांग्रेस के विधायक करण सिंह दलाल ने गोकशी पर शिकंजा कसने के लिए प्रदेश में एक तरफ सख्त कानून तो दूसरी तरफ बछड़ों के चमड़े से तैयार होने वाले उत्पादों पर पाबंदी को लेकर सवाल उठाया।
इन सवालों के जरिये उन्होंने सरकार को असमंजस में डाल दिया। विधायक के सवाल का कृषि मंत्री ओपी धनखड़ भी माकूल जवाब नहीं दे सके। नतीजतन मुख्यमंत्री को इसका जवाब देकर मोर्चा संभालना पड़ा। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि सरकार गो-संरक्षण व संवर्द्धन की पक्षधर है।
साथ ही वह गौकशी के खिलाफ है, लेकिन प्रदेश में चमड़े के कारोबार को प्रतिबंधित नहीं किया गया है। चर्म उद्योग से हजारों परिवार जुड़े हैं और चमड़े की आपूर्ति दूसरे प्रदेशों से की जाती है।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेसी विधायक करण सिंह दलाल ने कहा कि सरकार गायों के संरक्षण पर ध्यान दे रही है, लेकिन बछड़ों के चमड़े से बैग, जूते जैसे कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं। क्या सरकार बछड़े के चमड़े से बनाए जाने वाले उत्पादों को प्रतिबंधित करेगी।
दलाल ने यह भी तर्क दिया कि बछड़ों का खेतों में बैल के रूप में इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कई बार चमड़ा कारोबारियों के इशारे पर बछड़ों की तस्करी होगी है। कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा कि सरकार फिलहाल इस संबंध में कोई फैसला नहीं ले रही है, लेकिन प्रदेश में गोहत्या पूरी तरह प्रतिबंधित है।
दलाल के अलावा अन्य कांग्रेसी इन जवाबों से संतुष्ट नहीं हुए। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के धनखड़ का समर्थन करते हुए इस सवाल पर समय बर्बाद करने की बात कही। इसके बाद कांग्रेस विधायक एकजुट हो गए।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सरकार की ओर से लागू गोसंवर्धन कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि गाय, बछड़े, बैल सहित इस प्रजाति के सभी जानवरों की हत्या प्रतिबंधित है। सदन में सरकार ने दावा किया कि सरकार चमड़ा कारोबार व कारोबारियों के विरोध में नहीं है और फिलहाल इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।