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दोपहर को दिल मिले, शाम को चुनाव टिकट

Mon, 22 Sep 2014 10:14 AM IST
नसीब सैनी/अमर उजाला, कैथल
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सियासत में लॉटरी लगना तो इसे कहते हैं। दोपहर को जिस पार्टी में शामिल हुए, शाम को उसी ने टिकट भी दे दिया। ये किसी बॉलीवुड की राजनीतिक फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि कैथल विधानसभा की चुनावी तस्वीर है।
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दरअसल, शनिवार को हजकां के किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राव सुरेंद्र सिंह ने पार्टी छोड़ कर भाजपा का दामन थामा। दोपहर को वे प्रो. गणेशी लाल की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और शाम को कैथल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी।

कई अन्य दावेदारों को निराशा

ऐसा होने से भाजपा के पुराने एवं नए लगभग 20 से ज्यादा नेताओं को निराशा हाथ लगी है। हालांकि अभी तक किसी नेता के विरोध की बात सामने नहीं आई है। भाजपा द्वारा टिकट को लेकर पूर्व में कई बार सर्वे हुए। सर्वे में अपने नाम की बात होने को लेकर कई नेता अपने तरीके से टिकट को पक्का मान कर चल रहे थे।

रविभूषण गर्ग ने पार्टी के बुरे वक्त में दो चुनाव लड़े। वहीं अरुण सर्राफ व सुरेश गर्ग नौच पिछले दो माह से बाकायदा कार्यालय खोल कर चुनावी प्रचार अभियान में जुटे थे। इसके अलावा भाजपा के जिला अध्यक्ष राजपाल तंवर, वीरेंद्र छौत, अशोक गोयल सरीखे नेता भी टिकट की दौड़ में पिछड़ गए।

इन सभी के नामों पर हर रोज कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन राव सुरेंद्र सिंह ने सभी कयासों को धता बताते हुए टिकट की लड़ाई जीत ली। वे शनिवार को भाजपा में शामिल हुए तथा शाम को उन्हें उम्मीदवार चुन लिया गया। उधर, रविभूषण गर्ग ने कहा कि पार्टी ने जैसा उचित समझा, फैसला लिया है। हमें मंजूर है।
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ये है राजनीतिक कैरियर

राव सुरेंद्र सिंह ने वर्ष 1991 में बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ा था। उस समय उन्हें करीब नौ हजार से ज्यादा वोट मिले थे। इसके बाद वे हविपा और इनेलो में रहे। भाजपा में जाने से पहले वह हजकां के किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष थे।

गौरतलब है कि भाजपा ने कैथल हलके में 19 हजार से अधिक गुर्जर वोटों  को ध्यान में रखते हुए यहां से राव सुरेंद्र सिंह टिकट देने का फैसला किया है।

टिकट मिलने के बाद राव सुरेंद्र सिंह ने कहा कि वे पार्टी हाईकमान के आभारी हैं। सभी साथियों की मदद से कैथल में कमल खिलाकर नरेंद्र मोदी की झोली में डालेंगे।
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