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हरियाणा विस चुनाव में होने वाले वादों पर फिर टिकी किसानों की नजर, जानिए क्या चाहते हैं किसान

Tue, 17 Sep 2019 03:27 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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मुसीबत बणगी खेती, सरकार बी ध्यान नी देत्ती...किसानों ने इस गाने को इसलिए गुनगुनाना शुरू कर दिया है, क्योंकि उनसे पांच साल पहले किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए। खेती मुनाफे का सौदा नहीं बन पाई। संपूर्ण कर्ज मुक्ति का सपना अधूरा है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट हूबहू लागू नहीं हुई। पांच साल में खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा ही रही।
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प्रदेश सरकार ने हालांकि, योजनाएं तो बहुत शुरू की, घोषणा भी बहुत हुईं, मगर राशि सीधा किसानों तक नहीं पहुंच पाई। किसानों की उम्मीद बरकरार है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे अनुसार 2022 तक उनकी आय दोगुनी हो जाएगी। एक बार फिर विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, इसलिए किसानों की टकटकी चुनावों के समय होने वाले वादों पर लगी हुई है।

भाजपा-कांग्रेस की नीतियां किसानों के लिए एक जैसी
भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी, कर्म सिंह मथाना व प्रगतिशील किसान अच्छर सिंह उगाड़ा, जसविंद्र सिंह, हरबंस सिंह धुरकड़ा, हरकेश सिंह तेजामोहड़ी, निर्मल सिंह नकटपुर, शीशपाल चौहान खुड्डाकलां का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस की नीतियां किसानों के लिए एक जैसी हैं। कागजी घोड़े ही दौड़ाते हैं।
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किसानों को योजनाओं से सीधा फायदा नहीं हो रहा। जिससे उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बजाए कमजोर हो रही है। भावांतर भरपाई योजना किसान के बजाए व्यापारी के लिए लाभकारी है। कृषि यंत्रों पर जीएसटी लगा दिया, छह हजार रुपये चुनावी बेला में दिए।

नहीं मिला लागत से डेढ़ गुणा लागत मूल्य

पूर्व यूपीए सरकार के समय वर्तमान कृषि मंत्री ओपी धनखड़, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने के लिए अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया करते थे। उनकी मांग में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2100 रुपये प्रति क्विंटल करना भी शामिल था।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश बैंस ने बताया कि विपक्ष में रहते भाजपा नेता जो मांग कांग्रेस सरकार से करते थे, उसमें अपने पांच साल के शासनकाल में पूरा नहीं कर पाए। 2018-19 में गेहूं का एमएसपी किसानों को 1840 रुपये प्रति क्विंटल मिला है। फसल का एमएसपी सी-टू फार्मूला अनुसार लागत का डेढ़ गुणा देने का वादा भी किया था, मगर वादा हकीकत नहीं बन पाया।

डार्क जोन में 36 ब्लॉक
प्रदेश के 36 ब्लॉक के डार्क जोन में जाने से किसानों की चिंताई बढ़ती जा रही हैं। दक्षिण हरियाणा को एसवाईएल के पानी केलिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। उत्तरी हरियाणा के पंचकूला, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर में भी नहरी सिंचाई अभी सपना है। दादुपुर नलवी नहर बंद की जा चुकी है, और इसका विकल्प कोई दिया नहीं दिया।

मारकंडा, टांगरी नदी इस बरसात में भी किसानों व आम आदमी के लिए कहर बनी। खेतों व रिहायशी इलाकों में पानी घुसा। इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई केलिए करने की कोई योजना सिंचाई विभाग आज तक नहीं बना पाया।
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ये चाहता था किसान, हो नहीं पाया

. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट हुबहू लागू नहीं हुई
. फसल लागत का डेढ़ गुणा एमएसपी नहीं मिला
. फसल खरीद की गारंटी नहीं मिली
. संपूर्ण कर्ज मुक्ति नहीं
. गन्ने के रेट में मनमाफिक बढ़ोतरी नहीं

केंद्र, प्रदेश सरकार ने पांच साल में उठाए ये कदम
. सहकारी बैंकों के ऋणी किसानों का 4750 करोड़ रुपये का जुर्माना व ब्याज एकमुश्त निपटान स्कीम के तहत माफ।
. बिजली कनेक्शन वाले ट्यूबवेल उपभोक्ताओं का सरचार्ज माफ
. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना
. प्रधानमंत्री फसल सुरक्षा बीमा योजना
. भावांतर भरपाई योजना
. गन्ने के रेट में चालीस रुपये की बढ़ोतरी
. मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल
. प्रधानमंत्री सिंचाई योजना। अंतिम टेल तक पानी पहुंचाना।

 
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