हरियाणा की राजनीति को आज नई दिशा और प्रदेश निवासियों को नई सरकार मिलेगी। दोपहर 12 बजे तक नई बनने वाली सरकार की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिला तो दोपहर से जोड़-तोड़ की भी राजनीति भी शुरू हो जाएगी। चुनाव आयोग ने प्रदेश में मतगणना के लिए 57 केंद्र बनाए हैं।
इन केंद्रों की सुरक्षा के लिए 10 हजार पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इनके अलावा मतगणना के लिए 5 हजार कर्मचारी लगे हैं। इस बार विधानसभा के लिए 1351 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। इनकी हार और जीत उनकी राजनीति तय करेगी।
भाजपा-इनेलो दोनों रहें बहुमत से दूर लेकिन एकजुट हों तो बहुमत...
मतगणना के बाद यदि प्रदेश में ऐसी स्थिति बने कि भाजपा और इनेलो दोनों ही अपने-अपने दम पर 35 के आसपास के आंकड़े के करीब तो पहुंचें, लेकिन एक-दूसरे के बिना सरकार बनाने की स्थिति में न हों, तो संभव है कि दोनों दल साथ आने का प्रयास करें।
इस काम में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की भूमिका एक स्वाभाविक मध्यस्थ की हो सकती है। पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन है और हरियाणा में अकाली दल इनेलो के साथ है। ऐसे में बादल भाजपा और इनेलो के बीच की तल्खी कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री बादल जहां भाजपा के साथ गठबंधन में सरकार चला रहे हैं वहीं उनके ओमप्रकाश चौटाला परिवार से गहरे पारिवारिक रिश्ते हैं। सभी जानते हैं कि मुख्यमंत्री बादल की बात चौटाला परिवार का कोई सदस्य नहीं टाल सकता।
यदि भाजपा बहुमत से पीछे रहे...
मोदी फैक्टर के सहारे आत्मविश्वास से भरी भाजपा अगर प्रदेश में बहुमत से मामूली अंतर से दूर रही तो सरकार बनाने के लिए पार्टी की नजर सबसे पहले निर्दलीय और छोटे दलों पर ही टिकेगी।
इनके बाद पार्टी के पास दूसरा विकल्प कुलदीप बिश्नोई की हजकां के रूप में होगा। सत्ता के लिए कुलदीप बिश्नोई को मनाना भाजपा को गवारा होगा।
यदि इनेलो बहुमत के करीब रहे तो...
इनेलो अगर बहुमत के करीब तक ही पहुंची तो संभव है कि वह निर्दलीयों के अलावा गोपाल कांडा की हलोपा और विनोद शर्मा की हजपा का समर्थन हासिल कर सरकार बनाना चाहेगी।
भाजपा की तरह इनेलो के लिए दूसरा विकल्प हजकां हो सकता है। लेकिन शनिवार को यह चर्चा भी रही कि इनेलो और कांग्रेस सहयोग की सूरत तलाश रहे हैं और आने वाले दिनों में इस काम में नीतिश, लालू और शरद यादव एक सीमित भूमिका निभा सकते हैं।