विधानसभा चुनाव करीब आते ही विभिन्न दलों के नेताओं पर जनाधार बढ़ाने का दबाव भी बढ़ने लगा है। कोई जनसंपर्क अभियान के जरिए वोटरों को रिझाने में जुटा है तो कोई त्योहारों के बहाने लोगों के बीच पहुंचकर। कार्यक्रम अलग-अलग भले ही हों, लेकिन इनमें शरीक होने का मकसद एक है। सभी नेताओं को आम जनता याद आने लगी है।
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वे ऐसे मौके तलाशते हैं, जहां लोग जुटें और नेता अपनी सहभागिता दिखाकर खुद को हमदर्द साबित कर सकें। हालांकि, अभी सिर्फ एक ही प्रमुख पार्टी इनेलो ने अपने प्रत्याशी की घोषणा की है, लेकिन टिकट के दावेदार भी जनसंपर्क में खूब पसीना बहा रहे हैं।
सावन पूर्णिमा से त्योहारों की शुरुआत होने के बाद रक्षा बंधन, स्वतंत्रता दिवस, फिर कृष्ण जन्माष्टमी की धूम। नेताओं ने रक्षाबंधन पर महिलाओं से राखी बंधवाकर अपनापन दिखाया तो स्वतंत्रता दिवस पर भी कार्यक्रम में शरीक हुए। अब कृष्ण जन्माष्टमी पर मटका फोड़ कार्यक्रम के तहत इनाम की घोषणा करके भी एक खेमे को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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त्योहार यानी नेतागिरी चमकाने का मौका
अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए खुद को लोगों का हमदर्द साबित करने की जद्दोजहद चल रही है। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो लोगों की समस्याओं को हल कराने के लिए कभी सामने नहीं आए, लेकिन चुनाव आते ही खुद को हमदर्द साबित करने की जद्दोजहद कर रहे हैं। ऐसे में त्योहार का मौसम भी उनके लिए सहायक साबित हो रहा है।
वादों की लगा रहे झड़ी स्वतंत्रता दिवस पर गेस्ट बनकर पहुंचे कई नेताओं ने वादा किया है कि विधानसभा चुनाव में यदि उनका टिकट पक्का होता है और वह चुनाव जीतते हैं तो विकास कार्यों की झड़ी लगा देंगे। कुछ लोग इसे राजनैतिक पैतरे कह रहे हैं तो कुछ लोग उन्हें अपना हमदर्द समझ रहे हैं। खैर, टिकट मिले या न मिले, कम से कम लोगों के बीच पैठ बढ़ाने का मौका तो मिला है।
पंजाबी उम्मीदवारों पर दाव खेलेंगी पार्टियां
विधानसभा चुनाव की तारीख भले ही अभी तय नहीं हुई है, लेकिन पार्टियों ने जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू कर दी है। पंचकूला सीट पर बनिया और पंजाबी वोट ही किसी भी उम्मीदवार की ताजपोशी कराएगा। पिछले दिनों पंजाबियों की तरफ से आयोजित कांग्रेस के सम्मेलन में तो खुलेआम स्थानीय पंजाबी को टिकट देने की मांग भी उठी थी, जबकि मौजूदा विधायक बनिया समुदाय से हैं।
इंडियन नेशनल लोकदल ने पंचकूला में बनिया समुदाय के कुलभूषण गोयल को मैदान में उतारा है। सूत्रों के मुताबिक, विधायक डीके बंसल फिर से अंबाला जाकर राजनीति में भाग्य आजमाना चाहते हैं, लेकिन पार्टी ने अभी इजाजत नहीं दी है। अगर बंसल को कांग्रेस इस बार भी पंचकूला से चुनाव मैदान में उतारती है, तो दो बड़ी पार्टियों के प्रत्याशी एक ही समुदाय से होंगे।
भाजपा भी मैदान में उतार सकती है पंजाबी को
ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि भाजपा का प्रत्याशी भी पंजाबी समुदाय से ही होगा। हालांकि, भाजपा ने अभी कोई नाम तय नहीं किया और फिलहाल जिला अध्यक्ष विशाल सेठ, वरिष्ठ नेता ज्ञान चंद गुप्ता, श्याम लाल बंसल भी खुद को टिकट के दावेदार मान रहे हैं।
अगर भाजपा बनिया समुदाय के प्रत्याशी को टिकट न देकर पंजाबी समुदाय से किसी को टिकट देती है तो विशाल सेठ सामने आ सकते हैं, लेकिन इन दिनों भाजपा के एक वरिष्ठ नेता मनोहर लाल खट्टर का नाम भी पंचकूला सीट से चर्चा में जोरों पर है।
पंचकूला से कांग्रेस के टिकट पर अगर पंजाबी को टिकट मिलता है, तो मुख्यमंत्री के करीबी अशोक मेहता का नाम आ सकता है। हालांकि, पंचकूला में स्थानीय पंजाबी को टिकट देने की मांग हो रही है। अगर यह मांग मानी गई तो रविंद्र रावल और तरुण भंडारी का नाम सामने आ सकता है।
बता दें कि अशोक मेहता नारायणगढ़ से हैं और वहां उन्हें टिकट नहीं मिल सकता, क्योंकि मौजूदा विधायक एवं सीपीएस राम किशन गुज्जर दो बार से लगातार जीत रहे हैं। हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर पिछले दिनों पंचकूला में टिकट के दावेदारों के सम्मेलन में कह चुके हैं कि कोई भी मौजूदा विधायक अपना टिकट पक्का न समझें। ऐसे में मामला पेचिदा है।