वीरेंद्र शाह उर्फ बुल्लेशाह, पानीपत शहरी से उम्मीदवार
आयु- 70 वर्ष
शिक्षा- 10 वीं
राजनीतिक सफर
वीरेंद्र कुमार शाह के पिता हकुमत शाह पानीपत शहरी विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे। उनके बड़े भाई बलबीर पाल शाह पांच बार पानीपत शहरी सीट से विधायक रहे। इनका पूरा परिवार लगभग 65 साल से कांग्रेस में है। इन्होंने 2014 में पानीपत शहरी विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा की रोहिता रेवड़ी से हार गए।
टिकट मिलने का कारण
पानीपत में शाह परिवार का दबदबा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विश्वनीय व करीबी।
कोसली से कांग्रेस प्रत्याशी
नाम - जगदीश यादव
उम्र - 65
शिक्षा - स्नातक (बी.एस.सी ऑनर्स)
टिकट मिलने का कारण : पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से नजदीकियां
पहले चुनाव कब लड़ा : 1996 में बंसीलाल सरकार में पहली बार विधानसभा में जीत हासिल करके मंत्री बने थे। 2019 के चुनाव से ठीक पहले जगदीश यादव ने इनेलो को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्हें कोसली से टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन टिकट नहीं मिली। हालांकि टिकट नहीं मिलने के बाद भी वे भाजपा में ही बने रहे। काफी समय से उनकी पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से नजदीकियों के साथ कांग्रेस में पिछले वर्ष शामिल हुए थे।
कैथल के गुहला से देवेंद्र हंस बने कांग्रेस उम्मीदवार
नाम - देवेंद्र हंस
पार्टी- कांग्रेस
योग्यता- स्नातक
उम्र- 42
टिकट मिलने का कारण- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं। पिछले 2 साल से हलके में एक्टिव हैं। 2019 में बीजेपी के टिकट कर दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिला और निर्दलीय चुनाव लड़ा। चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे और साढ़े 29 हजार वोट लिए।
कैथल के कलायत से विकास सहारण बने कांग्रेस उम्मीदवार
नाम - विकास सहारण
योग्यता- स्नातक
उम्र- 38
टिकट मिलने का कारण- पूर्व केंद्रीय मंत्री व हिसार से सांसद जय प्रकाश के बेटे हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं। कलायत में काफी अच्छी पैठ है। पिता कलायत से 2014 में विधायक भी रह चुके हैं। कलायत हलके में लंबे समय से एक्टिव हैं।
सिरसा से गोकुल सेतिया की प्रोफाइल
नाम - गोकुल सेतिया
उम्र - 34 साल
शिक्षा - ग्रेजुएशन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
राजनीतिक सफर : वर्ष 2019 में गोकुल सेतिया ने टिकट के लिए दावेदारी पेश की। भाजपा की ओर से उन्हें टिकट नहीं दिया गया। सेतिया निर्दलीय चुनाव लड़े और 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने विधायक गोपाल कांडा को कड़ी टक्कर दी और लगभग 600 मतों से हार गए।
टिकट मिलने का कारण
गोकुल सेतिया पूर्व मंत्री लक्ष्मण दास अरोड़ा के नाती हैं। उनका पारिवारिक वोट बैंक है। युवा और जुझारू नेता हैं। पिछले चुनाव में हलोपा को अच्छी टक्कर दी थी। पंजाबी और बनिया समाज दोनों में गोकुल सेतिया की अच्छी पकड़ है।
रतिया - जरनैल सिंह
उम्र - 58 वर्ष
शिक्षा - स्नातक
राजनीतिक सफर
जरनैल सिंह ने पहली बार वर्ष 2000 में इनेलो के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और विधायक बने। बाद में इनेलो ने जरनैल सिंह को टिकट नहीं दिया और 2006 में जरनैल सिंह हजका में शामिल हो गए लेकिन 2008 की शुरुआत में हिसार में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में कांग्रेस का दामन थाम लिया। 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन इनेलो उम्मीदवार ज्ञानचंद से हार गए।
2011 में विधायक ज्ञानचंद की अचानक मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया और करीब 20000 मतों से जीतकर विधायक बने। मुख्यमंत्री हुड्डा ने उन्हें हरियाणा एग्रो का चैयरमैन भी बनाया। 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार रहे जरनैल सिंह तीसरे नंबर पर रहे, वहीं 2019 के चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी ने जरनैल सिंह को टिकट दिया लेकिन करीब 1200 वोटो से हार गए।
टिकट मिलने का आधार
पूर्व में दो बार विधायक हैं। रतिया क्षेत्र में कांग्रेस के सबसे मजबूत नेताओं में से एक हैं। उनका अपना वोट बैंक है। भाजपा की दो बार लहर के बावजूद जरनैल सिंह काफी अधिक मत लेकर नजदीकी मुकाबले में हारे। वोट को शिफ्ट कराने की ताकत रखते हैं। लोकसभा चुनाव में कुमारी सैलजा के लिए गांव में वोट भी मांगे। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के वफादार सहयोगियों में गिने जाते हैं।
कैथल विधानसभा से रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला बने कांग्रेस के उम्मीदवार
नाम - आदित्य सुरजेवाला
पार्टी- कांग्रेस
योग्यता- स्नातक
उम्र- 36
टिकट मिलने का कारण- पिता रणदीप सुरजेवाला अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं। पिता रणदीप सुरजेवाला राहुल गांधी के काफी करीबी हैं। वे कैथल से दो बार लगातार विधायक रहे और कांग्रेस के कार्यकाल में लगातार लोक एवं निर्माण विभाग में बिजली मंत्री भी रहे हैं। कांग्रेस में युवा चेहरा होना।
फतेहाबाद - बलवान सिंह दौलतपुरिया
उम्र - 56 वर्ष
शिक्षा - स्नातक
राजनीतिक सफर
बलवान सिंह दौलतपुरिया ने पहली बार वर्ष 2014 में इनेलो की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा। उन्होंने उस समय हजकां के उम्मीदवार और पूर्व सीएम स्व.भजनलाल के भतीजे दुड़ाराम को 3505 वोटों से हराया। बाद में बलवान सिंह 2019 में भाजपा में शामिल हो गए। मगर इस बार भाजपा की टिकट दुड़ाराम ले आए। इसके बाद किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने भाजपा छोड़कर कुमारी सैलजा के नेतृत्व में कांग्रेस ज्वाइन कर ली।
टिकट मिलने का आधार - पूर्व विधायक हैं। फतेहाबाद में कांग्रेस के सबसे मजबूत नेताओं में से एक हैं। उनका अपना वोट बैंक है। वोट को शिफ्ट कराने की ताकत रखते हैं। लोकसभा चुनाव में कुमारी सैलजा का फतेहाबाद हलके में पूरा प्रबंधन संभाला।
अंबाला सिटी विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी
नाम : निर्मल सिंह
उम्र : 71
गांव : मोहड़ा
शिक्षा : ग्रेजुएट
जाति : जाट
राजनितिक सफर : कांग्रेस नेता संजय गांधी के साथ राजनीति की शुरुआत की। 1974 में यूथ कांग्रेस ज्वाइन की। 1978 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी को लेकर जेल भरो आदोंलन में भाग लिया। 1982 में हरियाणा यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने। ये 4 बार विधायक रह चुके हैं और हरियाणा सरकार में मंत्री भी रहे हैं। 2015 में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष बने। 2019 में हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाया। 2022 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन की और राष्ट्रीय सचिव बने। 2024 में दोबारा कांग्रेस में घर वापसी हुई।
टिकट का कारण : राजनीति का पुराना अनुभव है। हुड्डा गुट के पुराने नेता हैं। क्षेत्र में भी मजबूत पकड़ है।
मुलाना आरक्षित विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी
नाम : पूजा चौधरी
उम्र : 39
गांव : मुलाना
शिक्षा : एलएलबी
जाति : एससी
राजनितिक सफर : पूजा चौधरी का कोई लंबा राजनितिक सफर नहीं है। हाल ही में सासंद बने वरुण चौधरी की पत्नी हैं। पहला चुनाव लड़ेंगी। इनके ससुर फूलचंद मुलाना प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं।
टिकट का कारण : इनके पति वरुण चौधरी की क्षेत्र में मजबूत पकड़ है और सांसद हैं। हुड्डा गुट से हैं।
जगाधरी विधानसभा क्षेत्र
नाम- अकरम खान
उम्र. 55
शिक्षा, बीए
कांग्रेस ने अकरम खान को जगाधरी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है। वर्ष 1998-1999 में वे बंसीलाल सरकार में हाउसिंग बोर्ड हरियाणा के अध्यक्ष बने। वर्ष 2005-2009 उनके राजनीतिक जीवन के एकमात्र वर्ष थे जब वे हरियाणा सरकार में किसी पद पर नहीं थे।
वर्ष 2007 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया और 2009 का चुनाव जगाधरी से उनके टिकट पर लड़ा और भारी अंतर से जीत हासिल की। 2018 को उन्हें पार्टी की नीतियों के खिलाफ जाने के कारण बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से निष्कासित कर दिया गया। अकरम खान 2019 को कुमारी शैलजा की उपस्थिति में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। इसके अलावा अकरम मार्च 2010 में हरियाणा के डिप्टी स्पीकर भी रह चुके हैं।
कैथल- पूंडरी से सुल्तान जडौला बने कांग्रेस उम्मीदवार
नाम - सुल्तान जडौला
पार्टी- कांग्रेस
योग्यता- स्नातक
उम्र- 62
टिकट मिलने का कारण- मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं। पूर्व सीपीएम और मंत्री रहे हैं। रोड़ बिरादरी से आते हैं। निर्दलीय चुनाव लड़ विधायक भी रह चुके हैं। पूंडरी हलके में लंबे समय से एक्टिव हैं।
बावल से कांग्रेस प्रत्याशी
नाम - डॉ. एमएल रंगा
उम्र - 69
शिक्षा - पीएचडी
टिकट मिलने का कारण : पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से नजदीकियां
राजनीति : हरियाणा में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। 2019 में भाजपा से इस्तीफा दिया था। कांग्रेस से बावल सीट से चुनाव लड़ा, मगर हार मिली थी। अब फिर से टिकट मिली है।
यमुनानगर विधानसभा क्षेत्र
नाम- रमन त्यागी
उम्र- 57
पार्टी- कांग्रेस
यमुनानगर विधानसभा क्षेत्र से उनको प्रत्याशी घोषित किया है। त्यागी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं। पिछले कई सालों से कांग्रेस को यमुनानगर में मजबूत करने के लिए सक्रिय हैं। इसके अलावा वे जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
राई विधानसभा क्षेत्र
नाम : जय भगवान आंतिल
आयु : 46 साल
शिक्षा : 12वीं
कांग्रेस ने राई विधानसभा क्षेत्र से गांव दीपालपुर निवासी जय भगवान आंतिल को टिकट थमाया है। जय भगवान आंतिल कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं और आंतिल बारहा खाप के प्रधान भी हैं। सामाजिक कार्यों में भाग लेने वाले जय भगवान आंतिल को कांग्रेस ने पूर्व विधायक जयतीर्थ दहिया की टिकट काटकर प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने गांव दीपालपुर से वर्ष 2010 में सरपंच का चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। वह करीब डेढ़ दशक से कांग्रेस से जुड़े हैं।
टिकट मिलने का कारण : युवा चेहरा, आंतिल बारहा के प्रधान और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं।